सिस्टम और सम्मान : गणतंत्र के बहाने... ये है बलिया वाले सोनू बाबू


ये सोनू बाबू है। खुशमिजाज इंसान के साथ कर्मठ और ईमानदार सरकारी कर्मी। बलिया सूचना कार्यालय में कार्यरत है। गणतंत्र दिवस के दिन जिला प्रशासन की तरफ से सीडीओ डॉ. विपिन जैन ने सम्मानित किया। सोशल मीडिया इफेक्ट था, मैंने तत्काल बधाई भी दे दी। था तो तीन ही शब्द, लेकिन हर शब्द से निकल रहे सवाल मुझे नि:शब्द करते रहे। सोचता रहा, आखिर बधाई किस चीज का दिया हूं। सोनू के बेहतर कार्य और कर्मठता को, या उस कर्मठता को मिले सरकारी प्रमाण को।
सोनू को नियुक्ति के दौरान से ही करीब से जानता हूं। वाकई काम भी लाजवाब है। यूं कहें कि कद और पद से कई गुना बोझ उठा कर चलता है, तो शायद गलत नहीं होउंगा। बहरहाल, सोनू को फिर से बधाई। लेकिन, बात सिर्फ सोनू की नहीं है। दरअसल हमने खुद को इस तरह से ढाल लिया है कि जब तक किसी के बेहतर काम पर सरकारी ठप्पा न लग जाये, उसकी काबिलियत आसानी से स्वीकार नहीं करते। अभी इसी हफ्ते न लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के करीबी रामचंद्र जी को पद्मश्री मिलने की खुशी पर तमाम लोगों ने उनकी उपलब्धियों का बखान शुरू किया।
हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना है कि अपने बगल में हो रहे बेहतरीन कार्यों को देख या परख नहीं पाते। समाज भी बड़े लोगों को बड़े सम्मान के लिए आवाज उठाता है, लेकिन अधिकतर यही दिखता है कि कोई लालच छिपा रहता है। सरकारी स्तर पर हर साल शिक्षकों को राज्यपाल और राष्ट्रपति सम्मान मिलता है। जब हमारे गांव या पड़ोस के स्कूल में पढ़ाने वाले गुरुजी का नाम शामिल होता है, तब हम यकीन करते हैं कि वो बेहतर काम करते है।
कहने को तो गणतंत्र है, लेकिन अक्सर गण तंत्र के पीछे ही रह जाता है। किसी के बेहतरीन कामों की सराहना हम तंत्र यानी सिस्टम की मान्यता से पहले भी कर सकते है। इससे और लोग भी प्रोत्साहित होंगे। बहरहाल, इस गणतंत्र दिवस पर जिला, राज्य और देश स्तर पर सम्मानित सभी को बधाई और शुभकामनाएं...

धनंजय पांडेय 'धनजी' वरिष्ठ पत्रकार, प्रभात खबर की फेसबुकवाल से

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