मौन नहीं रह पाऊंगा : बलिया के पत्रकार भरत चतुर्वेदी ने कुछ यूं दी 'धवल' को बधाई


सामाजिक यथार्थ को शक्ल देती कविता संग्रह 'मौन नहीं रह पाऊंगा' को पढ़ना एक ऐसे कवि मन को समझना है, जिसमें सामाजिक चेतना है। अव्यवस्था को लेकर आक्रोश है पर उदार है। संवेदनाओं को पाले एक नए भोर की उम्मीद में सामाजिक मूल्यों को थामे कवि मन अपनी बात बिना लाग-लपेट के रखा है। सच यह है कि बहुत अरसे बाद ऐसी कविता पढ़ने और समझने को मिली। यह पुस्तक एक दवा की तरह है, जो दुःखी मन को दिलासा देती है। प्रदीप तिवारी 'धवल' नई कविता के स्थापित रचनाकार हैं। दिसंबर 19 में इस पुस्तक का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ, जिसमें वरिष्ठ साहित्यकारों की टिप्पणी पढ़ी जा सकती है। मैं व्यक्तिगत तौर पर प्रदीप जी को इस अर्थ में बधाई देता हूं कि आपका यह प्रयास एक आंदोलन सा है, जिसके बाद कुछ नई राहें जरूर निकलेंगी। 

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