दिल्ली हाईकोर्ट का खो-खो यूपी ऑपरेशन, इंटरिम कमेटी के सभी निर्णय निरस्त


नई दिल्ली। 12 महीने यानी एक साल पूर्व 30 जनवरी 2020 को भारतीय खो-खो संघ ने ये कहते हुए उत्तर प्रदेश खो-खो एसोसिएशन की इंटरिम कमेटी बना दिया था कि UPKKA के अध्यक्ष संजय प्रताप सिंह (देवरिया) ने 19 दिसम्बर 2019 को KKFI को पत्र लिखकर बताया है कि 15 दिसम्बर 2019 को UPKKA के सचिव विनोद कुमार सिंह ने AGM (देवरिया) में अपने भाषण के दौरान अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इसलिए UPKKA को भंग कर दिया गया है।
KKFI ने संजय प्रताप सिंह के इसी पत्र के आधार पर UPKKA की इंटरिम कमेटी गठित करके संजय प्रताप सिंह (देवरिया) को ही उसका चेयरमैन तथा शिवानन्द नायक (देवरिया), लक्ष्मीकांत शुक्ला, राकेश त्रिपाठी, पवन गोयल को सदस्य और असगर अली को कन्वेनर बना दिया। इस दौरान कई नाटकीय मोड़ आये। इंटरिम कमेटी के गठन के एक सप्ताह बाद ही राकेश त्रिपाठी को यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि इनका नाम राकेश त्यागी के स्थान पर टाइपिंग एरर से छप गया है। यहां बताते चलें कि राकेश त्यागी (गाजियाबाद) KKFI के सचिव एमएस त्यागी के नजदीकी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। कुछ महीने बाद रविकान्त मिश्रा को कोऑर्डिनेटर बनाते हुए इंटरिम कमेटी में शामिल कर लिया गया।
एक साल की इस नौटंकी से तंग आकर जिला खो-खो एसोसिएशन बिजनौर के सचिव मुकुल कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर किया, तब जाकर 21 जनवरी 2021 को जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की कोर्ट में KKFI और संजय प्रताप सिंह के मिलीभगत की ये पोल खुली कि, 
इस पूरी घटना को एक सोचे समझे षणयंत्र के तहत अन्जाम दिया गया है। 

जिसमें ये तथ्य सामने आए
A- UPKKA के संविधान में अध्यक्ष उत्तर प्रदेश खो-खो एसोसिएशन के पास कार्यकारिणी भंग करने का अधिकार ही नहीं है।
B- एक सोची समझी चाल के तहत फेडरेशन के इशारे पर अध्यक्ष ने UPKKA को भंग किया जिसके बदले में संजय प्रताप सिंह (अध्यक्ष UPKKA) को ही इंटरिम कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया तथा देवरिया के ही शिवानन्द नायक को सदस्य बनाया गया।
फिलहाल हाइकोर्ट दिल्ली ने इस फर्जीवाड़े की गम्भीरता को संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है और निर्णय दिया है कि, UPKKA के खाता संचालन और इंटरिम कमेटी के सभी कार्यों पर रोक लगा दिया गया है।

इंटरिम कमेटी के सभी निर्णय निरस्त

इस दौरान इंटरिम कमेटी द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। यदि किसी भी नई जिला एसोसिएशन को मान्यता दिया गया है तो उसे निरस्त माना जायेगा एवम किसी भी जिले की कार्यकारिणी में कोई भी फेरबदल नही किया जाएगा। याचिका कर्ता मुकुल कुमार को एक सप्ताह के अन्दर अपना पक्ष माननीय दिल्ली हाईकोर्ट में रखना होगा।

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