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बलिया : एक्शन के बाद भी नहीं रूक रही पशु तस्करी


बैरिया, बलिया। बैरिया विधान सभा क्षेत्र पशु तस्करी के लिए मुफीद बन गया है। एनएच 31 व अस्थाई घाटों से भी जमकर पशु तस्करी हो रही है। पशु तस्कर किसी न किसी तरह बंगाल के बूचड़खानों में मेवेशियों को भेज दे रहे है। पशु तस्करों का नेटवर्क उन पशुओं को बग्लांदेश भी भेज देता है। लोग यह प्रश्न करने लगे हैं कि आखिर पशुओं की तस्करी कैसे और क्यो हो रही है। इसका जबाव ना तो पुलिस के पास है न सरकार के पास। हां इतना जरुर है कि सरकार व प्रशासन के लोग तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सभी प्रकार के प्रयास कर रहे है। बीते वर्ष 2000 पर गौर किया जाय तो बैरिया, हल्दी व रेवती में कई बार में 200 से ज्यादा गोवंशो को पुलिस ने बरामद किया। करीब एक दर्जन वाहन सीज हुए। वही लगभग तीन दर्जन से अधिक लोगो पर सम्बधित धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। 
सूत्रों के अनुसार बैरिया के एनएच 31 के रास्ते बिहार व झारखण्ड  होते हुए बंगाल, भारत-नेपाल सीमा, बांग्लादेश के सीमा तक  तस्कर गोवंश को तस्करी के जरिये पहुंचा देते है। तस्कर प्रति पशु 10 से 18 हजार रुपये का भारी मुनाफा कमा रहे हैं। आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियों की सुस्ती से यह अवैध कारोबार रूकने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। मवेशी तस्करी के लिए सड़क मार्ग के साथ तस्कर नदियों का सहारा भी लेते है। इसके पीछे अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बड़ा गिरोह काम करता है। 
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते यदि पशु तस्करी पर लगाम नहीं लगाया गया तो द्वाबा क्षेत्र में देशी गायों की तरह दुधारू भैंस भी खोजने पर नहीं मिलेंगी। 

पुलिस की पैनी नजर, नहीं होगी तस्करी

क्षेत्राधिकारी बैरिया आरके त्रिपाठी ने बताया कि उप्र बिहार सीमा पर चौकसी करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए सीमा पर तैनात पीकेट को आवश्यक निर्देश दिया गया है। पशु तस्करों पर नकेल कसने के लिए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। यदि कोई भी पशु तस्करी के कार्य में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभिन्न घाटों पर भी पुलिस की पैनी निगाह है।

शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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