बलिया : खूब वायरल हो रही बालिकाओं को समर्पित की शिक्षक की यह 'रचना'


बलिया। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर परिषदीय शिक्षक निर्भय नारायण सिंह ने राष्ट्र को एक रचना समर्पित किया है। साहित्य में रचे-बसे निर्भय नारायण सिंह शिक्षक नेता भी है। बालिका दिवस पर रचित इनकी यह रचना की खूब सराहना हो रही है।

धरा की परछाई हूँ,
समुद्र की गहराई भी। 

व्योम की ऊँचाई हूँ,
मर्यादा की लम्बाई भी। 

सत्यवान की सत्यवती हूँ, 
प्रसाद की ध्रुवस्वामिनी भी। 

शफ़क़ की धीरज हूँ,
ममता की मूरत भी। 

हरिश्चंद्र की शैव्या हूँ,
झाँसी की लक्ष्मी भी। 

दिल्ली की निर्भया हूँ,
अंतरिक्ष की सुनीता भी।

भारत की इन्दिरा हूँ,
सं•रा• की कमला भी।

सृजन की आधार हूँ,
संहार की काली भी। 

पर बात फ़क़त है मेरी,
मैं इक बेबस बाला भी। 

पर ! बता कसूर भेद का मेरे, 
क्या नहीं हक़ वजूद भी ?

निर्भय नारायण सिंह
शिक्षक, बलिया

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