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बलिया : नवाचारों-विचारों का मंथन कर बेसिक शिक्षकों ने निकाला 'खास मणि', ताकि...


-भाषा व्यक्तित्व को संवारने का साधन : प्रवीण यादव
-इंग्लिश मीडियम स्कूल के अध्यापकों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम सम्पन्न

आशुतोष ओझा
बलिया। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी इंग्लिश मीडियम स्कूल के अध्यापकों के तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का समापन सोमवार को हुआ। अंतिम दिन मुरली छपरा, बैरिया, बेलहरी, मनियर और नगर क्षेत्र के ऊर्जावान अध्यापकों ने विद्यालयों में अपनाए जा रहे नवाचारों और विचारों को साझा करते हुए अंग्रेजी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।


जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) प्रवीण यादव ने कहा कि भाषा का विकास व्यक्तित्व विकास के साथ जुड़ा है। अगर हम बच्चे के अंदर भाषा को विकसित करते हैं तो हम उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। अंग्रेजी भाषा की स्वीकारोक्ति गांव से लेकर शहर तक हो चुकी है। इसे सीखना प्रत्येक बच्चे के लिए आवश्यक है।


संचालन कर रही चित्रलेखा सिंह ने इंग्लिश के महत्व के बारे में बताया। कहा कि इंग्लिश के व्यापक उपयोग के कारण ये अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित हो रही है। मोबाइल पर भेजे जाने वाले मैसेज भले ही हिंदी में हों, लेकिन वे अंग्रेजी की रोमन लिपि में लिखे जाते है। एसआरजी संतोष चंद्र तिवारी व आशुतोष कुमार सिंह तोमर ने अंग्रेजी भाषा शिक्षा को बच्चों की रोजमर्रा से जोड़ने की बात कही। शिक्षिका पूनम सिंह व सरवत अफ़रोज़ ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि सीखने-सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की समस्याओं को जानना और कुंठाओं को दूर करके आत्मविश्वास जागृत करना अति-आवश्यक है। कुंठा केवल इंग्लिश ही नहीं, अन्य विषयों के सीखने में भी बाधक है। कार्यक्रम संयोजक व नगर शिक्षा क्षेत्र के एआरपी डॉ. शशि भूषण मिश्र ने सभी अध्यापकों से अंग्रेजी शब्दों का विद्यालयी वातावरण में अधिकाधिक प्रयोग करने की बात कही। साथ ही अंग्रेजी भाषा के लिए समृद्घ वातावरण देने पर बल दिया। कार्यशाला में सुनील सिंह, अवनीश पांडेय, सुजीत सिंह, आशुतोष ओझा, जय प्रकाश सिंह, हरे राम शर्मा आदि ने अपना अनुभव साझा किया।

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