सर्द रात की दर्द भरी दास्तां : बलिया DH में दिखी रेडक्रास की इंसानियत


बलिया। शनिवार की रात करीब साढ़े आठ बजे जिला अस्पताल के प्रांगण में ठंड से ठिठुरी एक तीन साल की बच्ची रो रही थी। उसके आस-पास कुछ लोग यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि आखिर बच्ची रो क्यों रही है ? कुछ को लगा कि बच्ची सम्भवतः भूख से रो रही है ? उन लोगों ने बच्ची को बिस्किट खरीद कर दिया।
 

वहीं, भीड़ के दूसरी तरफ रेडक्रॉस सोसायटी के शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय एवं डॉ. पंकज ओझा किसी मरीज का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। उन लोगों की नजर न सिर्फ उस रोती बच्ची पर, बल्कि बेसुध होकर जमीन पर लेटी उसकी मां पर भी टिकी। जानकारी की गई तो पता चला कि किसी भट्ठठे पर काम करने वाली महिला है। उसको चोट लगी थी। उसे प्रशासन की मदद से अस्पताल लाया गया था। उसकी ड्रेसिंग भी की गई ‌थी। ठंड से ठिठुरती बच्ची अपनी मां के बगल में  पड़ी रो रही थी।
 

मानवता का परिचय देते हुए रेडक्रॉस सोसायटी बलिया के सचिव डॉ. पंकज ओझा एवं कोषाध्यक्ष/स्टेट मैनेजिंग कमेटी सदस्य शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय तत्काल बाजार पहुंचे। फिर न सिर्फ ऊनी कंबल एवं चादर खरीद कर लाये, बल्कि मां के बगल में रोती बच्ची को सुलाकर कंबल ओढ़ाकर चले गये।रेडक्रॉस सोसायटी की इस पहल को देख वहां मौजूद लोगों की जुबां से एक ही आवाज निकली इंसानियत अभी जिन्दा है।

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