बलिया : वर्षों से धूल फांक रहा आदेश, कैसे लगेगी भ्रष्टाचार पर रोक


खेजुरी, बलिया। भ्रष्टाचार समाप्त करने की प्रदेश सरकार की मंशा पर उसके अधिकारी व कर्मचारी ही पानी फेर रहे हैं। लाख प्रयास के बाद भी न तो भ्र्ष्टाचार पर रोक लग पा रही है और न ही आरोपितों पर ही लगाम।  इससे लोगों के मन में तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की दुंदुभी बजने से पूर्व एक बार फिर प्रदेश सरकार ग्राम प्राधनों के खाते की जांच कराने की मंशा जाहिर की है, लेकिन पूर्व के सरकारी क्रियाकलापों को देखकर लोगबाग इसे जुमलाबाजी ही मान रहे हैं। वजह की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर  सरकारी रकम में हेराफेरी करने के दर्जनों मामलों में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। यही नहीं, कई दर्जन ग्राम पंचायतों की फाइलें महीनों से धूल फांक रही हैं। इससे करोड़ो की सरकारी रकम हजम करने वाले जहां मौज कर रहे हैं, वहीं भ्रष्टाचार को लेकर सरकारी मंशा सवालों के घेरे में है। नजीर के तौर पर पंदह ब्लाक अंतर्गत चक उसरैला को देखा जा सकता है। गांव के सफरे आलम ने अक्टूबर 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगरौत को शिकायती पत्र देकर प्रधान पर वित्तीय अनियमितता बरतने का न सिर्फ आरोप लगाया, बल्कि साक्ष्य भी प्रस्तुत किये। साक्ष्य के आधार पर जिलाधिकारी ने लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) समेत समाज कल्याण विभाग व पीडब्ल्यूडी के अवर अभिन्यताओं की तीन सदस्यीय टीम गठित कर 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट सौपने का आदेश दिया था। दुर्भाग्य से उसी समय तत्कालीन डीएम का तबादला हो गया और जांच का वह आदेश एक साल से धूल फांक रहा है। हद तो यह हो गयी कि इस बाबत कई बार जिले के सक्षम अधिकारियों को अनुस्मारक पत्र भी दिया गया, पर बात नहीं बन पाई। यही स्थिति इसी विकासखंड के बनकटा व जनुआंन ग्राम पंचायत की भी है। मनरेगा सहित पीएम आवास, शौचालय निर्माण व अन्य विकास कार्यों में अनियमितता बरतने के आरोपियों की फाइल जांच कमेटी के सदस्यों की टेबल की शोभा बढ़ा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पंचायत चुनाव से पूर्व प्रधानों की जांच की सरकार की मंशा कहा तक सफल हो पाएगी। वही दूसरी ओर जांच न होने से सरकारी खजाने के चौकीदारों की लूट खसोट की मंशा दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

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