बलिया : खाता संचालन पर रोक के बाद चढ़ने लगा चुनावी पारा, फरवरी-मार्च में...


-राजनीतिक सरगर्मियां तेज, सजने लगी चुनावी चौपाल
-फरवरी-मार्च में प्रस्तावित है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

अजीत पाठक
खेजुरी, बलिया। ग्राम प्रधानों के खाते पर 25 दिसम्बर की अर्धरात्रि से रोक लगने के बाद गांवों की आबोहवा बदल गयी है। आगामी पंचायत चुनाव को लेकर राजनीति  सरगर्मी तेज होने लगी है। दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाना भी शुरू कर दिये हैं। हालांकि अभी आरक्षण को लेकर स्थिति अस्पष्ट होने से कुछ दावेदार वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। बावजूद गंवई राजनीति का पारा धीरे धीरे चढ़ने लगा है। जिले के कुल 945 ग्रामसभाओं में प्रधान, सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव फरवरी-मार्च तक कराने की योजना है। सरकार द्वारा प्रधानों के खाता संचालन पर रोक लगाने के बाद जहां चुनावी बिगुल का शंखनाद हो गया वहीं  गांवों का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। प्रधान पद सहित अन्य पदों के दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं। शाम ढलते ही गांवों की चौपाल सज जा रही है। जहां निवर्तमान प्रधान का लेखाजोखा किया जा रहा वहीं भावी प्रत्याशियों को लेकर देर शाम तक चुनावी चर्चा चल रही है। हालांकि अभी आरक्षण की स्थिति साफ नहीं है लेकिन लोगबाग अपने तरीके से संभावनाओं को रख रहे हैं। और उसी आधार पर ही किसका पलड़ा भारी रहेगा इसकी भी चर्चा शुरू हो गयी है।

इस बार खास होगा चुनाव
कोरोना संक्रमण के कारण इस बार पंचायत चुनाव करीब पांच माह देर से होगा। 2015 में नवम्बर तक पंचायत चुनाव कर लिया गया था। वहीं ग्राम प्रधान व सदस्यों का चुनाव एक साथ कराया गया था, जबकि क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत का चुनाव साथ हुए थे। इस बार चारों पदों के लिए एक साथ चुनाव कराने की योजना है। लिहाजा राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज रहने की उम्मीद है। इसके अलावा 2022 में होने वाले विस चुनाव को देखते हुए गांव स्तर पर राजनीतिक दल भी अपना पलड़ा भारी करने की जोर जुगत में है। लिहाजा प्रधान से लेकर क्षेत्र व जिला पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों की भागीदारी होने से चुनावी माहौल खास होने की उम्मीद है।

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