बलिया : 'संकल्प' के आंगन में एक विभूति की जयंती तो दूसरे की मनी पुण्यतिथि


बलिया। भिखारी ठाकुर अपने समय के सामाजिक विडम्बनाओं को ही नहीं, बल्कि आने वाले समय के सामाजिक विडम्बनाओं और विसंगतियों को भी अपने नाटकों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं। पलायन की समस्या हो या स्त्री विमर्श भिखारी ठाकुर के नाटकों में मुखर रूप से प्रतिबिम्बित होता है। उक्त बातें जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने भिखारी ठाकुर की जयंती और जनवादी शायर अदम गोंडवी की पुण्यतिथि पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अदम गोंडवी जनता के कवि थे, उनकी रचनाओं में आम आदमी के दुःख दर्द और संघर्ष की अभिव्यक्ति होती है। 

'संकल्प' साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया के मिश्र नेवरी स्थित कार्यालय पर भिखारी ठाकुर की जयंती एवं अदम गोंडवी की पुण्यतिथि के अवसर पर विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेन्द्र भारती ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने सहज और सरल भाषा में आम जन के दुःख दर्द और बेचैनी को कलात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है और उनके मन मस्तिष्क पर छा गए।वहीं अदम गोंडवी की रचना सीधे-सीधे सत्ता से टकराती है। मोहन जी श्रीवास्तव ने कहा कि समाज को सामाजिक विडम्बनाओं के जकड़न से बाहर निकालने में इन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन कर रहे संकल्प के सचिव आशीष त्रिवेदी ने कहा कि भिखारी ठाकुर भोजपुरी समाज के धरोहर और भोजपुरी संस्कृति के सच्चे संवाहक थे। उनकी रचनाएं और नाट्य प्रस्तुतियां कलाकारों के लिये हमेशा प्रेरणास्त्रोत रहेंगी। 

उन्होंने कहा कि अदम गोंडवी प्रतिरोध के रचनाकार थे, उनकी रचनाएं समाज के दबे कुचले लोगों का स्वर बनती हैं और शासन तथा सत्ता से सीधे सवाल करती हैं। गोष्ठी में डॉ इफ्तेखार खां, पण्डित ब्रज किशोर त्रिवेदी, समाजसेवी भानु प्रकाश सिंह और ट्विंकल गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किये जबकि डॉ. कादम्बिनी सिंह,विनोद यादव,अचिन्त्य त्रिपाठी,सागर और वैभव ने अपनी कविता के माध्यम से इन दोनों रचनाकारों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।संकल्प के रंगकर्मियों ने आनन्द कुमार चौहान और सोनी के नेतृत्व में बिदेसिया गायन और अदम गोंडवी के नज़्मों का प्रस्तुतिकरण किया। इनका साथ दिया ट्विंकल गुप्ता, वैभव उपाध्याय, राहुल, रोहित, विशाल, अनुपम और अखिलेश ने।

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