बलिया के श्रीराम ने लिखी 'श्रीमद् भगवद्ः गीता-सार', वक्ताओं ने बताई महत्ता


बलिया। टैगोर नगर, नई बस्ती स्थित बुद्ध देव संस्थान के सभाकक्ष में श्रीराम वर्मा (अवकाश प्राप्त डिप्टी पोस्टमास्टर) द्वारा लिखित पुस्तक 'श्रीमद् भगवद्ः गीता-सार' का विमोचन सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा के पूर्व प्राचार्य डा. गणेश कुमार पाठक की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में की अध्यक्षता साहित्यकार डा. भोला प्रसाद 'आग्नेय' ने की।
श्री सुदिष्ट बाबा स्नातकोत्तर महाविद्यालय सुदिष्टपुरी, रानीगंज के हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. विवेकानन्द देव पाण्डेय ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म करने की निरन्तर प्रेरणा देने वाली पथ प्रदर्शक है। वेदों, पुराणों, उपनिषदों एवं स्मृतियों का सार सरल शब्दों में संपुट कर व्यास जी ने यह अमूल्य थाती 'गीता' के नाम से हमें सौंप दी है। जम्मू-कश्मीर से पधारे स्वामी कृष्णानन्द जी ने कहा कि गीता के माध्यम से शुभ कर्मों एवं सत्कर्मों की सरल  व्याख्या प्रस्तुत की गयी है। शुभफल मनुष्य को शुभफल की प्राप्ति कराकर सांसारिक जीवन को सुखद बनाते हैं।
बतौर मुख्य अतिथि डा. गणेश कुमार पाठक ने कहा कि गीता ज्ञान, कर्म एवं भक्ति की त्रिवेणी है, जिसमें योग की धारा भी प्रवाहित होती है। इन सबके माध्यम से गीता हमें शुभ कर्म एवं सत्कर्म करने के लिए प्रेरित करती रहती है। गीता में बताये गये तत्वों एवं मार्गों के अनुपालन से ही हम आवागमन एवं कर्मवंधन से मुक्त होते हैं। गीता हमें भवबाधा से पार कराती है। गीता में इतना ज्ञान भरा है कि वह आज भी अबूझ पहेली बनी हुई है और नित्य नये-नये अध्ययन हो रहे हैं।अध्यक्षीय उद्बोधन में डा. भोला प्रसाद 'आग्नेय' ने कहा कि गीता का स्वरूप हर व्यक्ति है। मन कृष्ण है, पांचों ज्ञानेन्द्रियां पांच पाण्डव और एक सौ अपना विकार ही कौरव हैं। इन विकारों पर मन के निर्देशानुसार पांचों ज्ञानेन्द्रियों द्वारा विजय प्राप्त करना ही गीता का संदेश है। इस अवसर पर श्रीराम वर्मा, श्रीराम प्रसाद सरगम, फतेहचंद बेचैन एवं आग्नेय जी ने कविता पाठ भी किया। इस कार्यक्रम में बैजनाथ पाण्डेय, ओम प्रकाश दूबे, शिववचन वर्मा, उमेश चंद्र वर्मा, अनुपम वर्मा, प्रीत मिश्र, देवांश कुश्वाहा, हृदयानन्द आदि प्रबुद्धगण उपस्थित रहे।

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