सत्संग भवन का शिलान्यास कर सांसद ने कहा 'मैं विरोध से नहीं डरता...'

बैरिया, बलिया। कृषि की परंपरा कानून से नहीं, ऋषि परंपरा से संचालित होती है। यह विषय व बात हमारे ऋषियों ने काफी अन्वेषण के बाद सिद्ध किया है। उक्त उद्गार सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के है। 

बुधवार को बाजिदपुर स्थित संत भाला बाबा की तपोस्थली प्रांगण में 25 लाख की लागत से बनने वाले सत्संग भवन के शिलान्यास के बाद बतौर मुख्य अतिथि किसान संवाद को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विचारों की पार्टी है। उसी विचार को लोगों ने पसंद करते हुए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया है। इसका नतीजा सामने आ रहा है कि किसान बिल बनाकर पूरे देश को समर्पित कर दिया गया है। विरोधी गला फाड़ते रह गये और किसानो का भला हो गया। इस बिल से देश के समस्त किसानों को लाभ ही लाभ मिलेगा। कांग्रेस, सपा व बसपा पर निशाना साधते हुए किसानों के लिए संचालित तमाम योजनाओं का जिक्र किया। बताया कि किसान के उत्पाद के लिए इंस्पेक्टर राज खत्म हो गया है। किसान अब चहुओर से समृद्ध होगा। कहा कि जनप्रतिनिधि के लिए जनता की जवाबदेही सदा बनी रहती है। श्री मस्त ने  गांव के लोगों से आग्रह किया कि सत्संग भवन निर्माण में मानक की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। गांव के लोगों की यह जिम्मेदारी है कि भवन निर्माण के समय मानक का पूरा ध्यान रखें।उन्होंने यह भी घोषणा किया कि द्वाबा के सभी संत महात्माओं की तपोस्थली पर कुछ न कुछ निर्माण कार्य अवश्य होगा। कहा कि मैं विरोध से नहीं डरता हूं। इस देश में राम और कृष्ण का विरोध भगवान होते हुए हुआ तो मैं फिर भी इंसान हूं। मेरा विरोध जब होता है तो मेरी दृढ़ता और बढ़ जाती है। मैं किसी विरोध की चिंता नहीं करता। उन्होंने नौजवानों से आग्रह किया कि सत्संग भवन बन जाने के बाद वर्ष में 3 दिन यहां सत्संग हो और गांव के सभी युवा सत्संग भवन के सामने सुबह-सुबह खुली धूप में कसरत करें। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू, सरल सिंह, प्रधान सत्येंद्र सिंह, रजनीश श्रीवास्तव, सांसद प्रतिनिधि सुशील पांडे, श्यामसुंदर उपाध्याय, मंटू बिंद, तेज नारायण मिश्र, अश्वनी बुझा तारकेश्वर गोंड, दुर्ग विजय सिंह झलन, दिलीप गुप्ता, रामकृष्ण दुबे, अरुण सिंह, देव कुमार पांडे, आत्मानंद पांडे, दइबदयाल सिंह, विश्वनाथ मिश्रा, अरुण पांडे, आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता दीनानाथ सिंह व संचालन पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार पांडे मुनी पांडे ने किया।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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