इन मौतों की 'केमेस्ट्री' पर कब जागेगा बलिया प्रशासन


केस नम्बर 01
7 सितम्बर को सनौली-बलिया राजमार्ग पर हल्दीरामपुर के पास बोलेरो की चपेट में आने से महिला की मौत, जबकि महिला का पति व पुत्र गम्भीर रूप से घायल।

केस नम्बर 02
28 अगस्त 2020 को नगरा के बेल्थरारोड मुख्यमार्ग पर तेज रफ्तार पिकप ने होम्योपैथिक दवा सप्लायर को अपनी चपेट में लिया। मौके पर मौत।

केस नम्बर 03
बैरिया थानाक्षेत्र के दलपतपुर चट्टी पर बेकाबू बाइक से टकराकर पैदल जा रहे धर्मनाथ यादव गम्भीर हालत में घायल। अस्पताल में मौत।

केस नम्बर 04
बैरिया मांझी रोड स्थित नवका टोला चट्टी पर खनन से भरे ट्रक ने बुजुर्ग को रौंदा।

केस नम्बर 05
सबसे अधिक चर्चित दुर्घटना 24 अप्रैल की है, जब ईंट भट्ठा पर कार्य करने वाली मां-बेटी को रसड़ा नगर के आजाद चौराहा के समीप एक तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। इस दुर्घटना में मां उषा देवी (40) व बेटी पुष्पांजलि (12) ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

बलिया। उपरोक्त दुर्घटनाएं तो बस बानगी भर है, यदि सिलसिलेवार जनपद भर में हो रही दुर्घटनाओं का जिक्र करे तो इसकी फेहरिस्त काफी लंबी हो सकती है। सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर जनपद में हो रही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर से कौन सी कवायद हो रही है। मुख्यमार्ग पर वाहनों की रफ्तार देखकर यही लगता है जैसे यमराज साक्षात विचरण कर रहे हो। जनपद भर के मुख्यमार्गों की बात करे तो उनकी हालत किसी से छुपी नहीं है। केवल बैरिया-हल्दी-बैरिया मार्ग जो की बेलहरी से बैरिया तक अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इस मार्ग पर चलना मानो मौत के कुएं में प्रदर्शन करना हो।

जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे नित नए हादसों को न्योता देते है। रही सही कसर सड़क किनारे कटानरोधी कार्य के लिए रखे बोल्डरों ने पूरा कर दिया है। संकीर्ण मार्गो पर फर्राटे भरते वाहनों की गति सीमा पर कोई लगाम नहीं होता। सही तरीके से अवलोकन किया जाए तो अप्रशिक्षित चालकों और खराब सड़कों की केमेस्ट्री ने न जाने कितने घरों का दीप बुझा दिया। दर्जनों ने छोटी-मोटी दुर्घटनाओं में अपने हाथ पैर गंवा दिए।प्रशासनिक स्तर से समय-समय पर ऐसे वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस जांच सहित गति सीमा पर भी फोकस डालना नितांत आवश्यक है। बेशक हेलमेट और मास्क अनिवार्यता पर चालान जायज है, लेकिन इन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।


रवीन्द्र तिवारी

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