बलिया प्रशासन की 'उस' क्लीनचिट पर BJP विधायक ने उठाया सवाल


बैरिया, बलिय। सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त के भांजे विनय सिंह को जिला प्रशासन द्वारा क्लीनचिट दिये जाने पर बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह निर्णायक मूड में आ गये है। मीडिया से मुखातिब विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि विनय सिंह लोभ में अन्धे हो चुके हैं। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के संम्बधी होने के बाद भी उस जमीन पर नजर गड़ाये है, जहां सैकड़ों वर्ष से पशु मेला लगता है। यह जानने के बाद भी उस जमीन की रजिस्ट्री करवा लेना ही राजनीतिक कैरियर को कलंकित करने जैसा है। जांच अधिकारी ने सिर्फ रजिस्ट्रार आफिस बैरिया में स्टाम्प शुल्क देकर रजिस्ट्री को सही बताकर मूूूल जांच की दिशा को बदलने का प्रयास किया हैं। 
मैं इसके लिए जन आन्दोलन खडा करुंगा।कोरोना समाप्त होते ही द्वाबा के गांव-गांव जाउंगा और पापी लोगों की मानसिकता के बारे में लोगों को बताने का काम करुंगा। आवश्यता पड़ी तो सुदिष्ट बाबा पशु मेला की जमीन केे लिए जीवन का अन्तिम सांस तक आमरण अनशन भी करुंगा। मैं जिलाधिकारी की इस जांच से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। जिलाधिकारी ने अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया हैं। हमने जिलाधिकारी से मांग किया था कि पशु मेला की जमीन आराजी नं 702 व 795 में दर्जनों लोगों ने फर्जी तरीके से नामांतरण करवाकर जमीन को बेचा है, लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी जांच ना करवाकर सिर्फ खतौनी में दर्ज नामांतरण के आधार पर क्रय और विक्रय की जांच कराया। इसमें स्वभाविक है कि खतौनी में जिसका नाम है, उतने की मालियत के आधार पर स्टाम्प शुल्क देकर रजिस्ट्री करवा लेना जांच की दिशा को बदलने जैसा है। सन् 1975 से 1985 के बीच में फर्जीवाडा करके नाम चढ़वाया गया है। वही बिन्दु नं 3 में खसरा नं 702 में 47 व्यक्तियों को आसामी पट्टा भूमि प्रबंधक समिति के प्रस्ताव दिनांक 26 दिसम्बर 1975 को तहसीलदार/ उपजिलाधिकारी को जांच कराकर पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही के लिए आदेश जारी किया है। इन सबकी जानकारी के बावजूद उचित कार्यवाही नहीं करना, खुद फर्जी करने वालो से प्रशासन की मिलीभगत का संकेतक हैं। अपने आपको डायरेक्टर कहने वालो को लज्जा आनी चाहिए कि स्वयं जांच रिपोर्ट में लिखा है कि उस जमीन पर पशु मेला लगता है और उस भूमि पर किसी का कब्जा नहीं है।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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