बलिया डीएम ने निर्धारित की डेटलाइन, अलर्ट रहे जिम्मेदार


बलिया। जिलाधिकारी एसपी शाही ने साफ कहा है कि 5 अक्टूबर तक हर राजस्व गांव में चकमार्ग से अतिक्रमण हटाने व वरासत के लम्बित मामलों के निस्तारण के लिए अभियान चल रहा है। अगर इस तिथि के बाद कोई ​अविवादित वरासत का मामला लम्बित मिला तो सम्बन्धित लेखपाल या जो भी इसके जिम्मेदार होंगे, उनको सस्पेंड कर कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने इस अभियान पर कड़ी नजर रखने क निर्देश सभी एसडीएम व तहसीलदार को दिया है।

दरअसल, शासन के निर्देश पर हर राजस्व ग्राम में खतौनी पढ़ने का कार्य जारी है। जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी व सभी एसडीएम भी किसी न किसी गांव में खतौनी पढ़ रहे हैं। सदर तहसील के राजस्व ग्राम जमुआ व दुबहड़ में जिलाधिकारी एसपी शाही स्वयं खतौनी पढ़ने पहुंचे। उन्होंने पूर्व माध्यमिक विद्यालय माफी दुबहड़ पर खतौनी पढना शुरू किया तो कुछ प्रकरण ऐसे आए, जिसमें काश्तकार की मृत्यु लगभग 15 वर्ष पूर्व हो चुकी है लेकिन वरासत नहीं हुई है। कुछ तीन वर्ष से लम्बित वरासत के मामले आए। जिलाधिकारी ने लेखपाल से कारण पूछा तो बोलती बंद हो गई। उन्होने लेखपाल को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि 5 अक्टूबर से पहले हर हाल में ऐसे लम्बित मामलों को निपटा लें। चेतावनी दी कि अगर उसके बाद भी कोई अविवादित प्रकरण पेंडिंग मिला तो सम्बन्धित लेखपाल को तत्काल​ निलम्बित या कोई अन्य कठोर किया जाए। इसके बाद जिलाधिकारी जब जमुआ गए तो वहां काफी कम संख्या में लोग आए थे। इस पर उन्होंने सम्बन्धित लेखपाल से इसका कारण जाना। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद तहसीलदार गुलाब चन्द्रा को निर्देश दिया कि हर गांव में लेखपाल डुग्गी या मुनादी करा दें, ताकि लोग इकट्ठा हो जाएं। तहसीलदार ने गांव की एक—एक खतौनी को पढ़ा। जिलाधिकारी ने वरासत के प्रकरण के सम्बन्ध में पूछताछ की तो लेखपाल ने बताया कि कुल 13 प्रकरण आये हैं। इस पर उन्होंने सभी लम्बित वरासत को जल्द से जल्द निपटा कर अवगत कराने के निर्देश दिए। इस दौरान पप्पू सिंह, मनोज सिंह, सत्येन्द्र यादव, हरेनाथ पाण्डेय, भोला सिंह, मंगलदेव सिंह व अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

जर्जर सड़क की समस्या पर एक्सईएन को किया निर्देशित

क्षेत्र भ्रमण के दौरान माफी दुबहड मे ग्रामीणों ने एनएच-31 दुबहड से मिल्की (आराजी माफी दुबहड) को जोड़ने वाली सडक की जर्जर स्थिति से अवगत कराया। बताया कि वर्ष 2016 में आरईएस द्वारा इसका निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं। जिलाधिकारी ने आरईएस के अधिशासी अभियंता को इसके लिए निर्देशित किया।

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