बलिया की बेटी नेहा ने शब्दों में पिरोया बेरोजगारों का दर्द, 'देख के नेताजी के माजा, पढलका...'


कुल बेकार बा


आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...
आवते चुनाव किसीम किसीम के वादा क के ललचावतारें, 
खाता में पनरह लाख रुपिया आ घरे घरे रोजगार भेजवावतारें, 
हो गइल चुनाव ल घण्टा रोजगार मांगे रोड प आ जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढला लागे लागल साजा...

बान्ही के तरह-तरह के जुमला जहुआ दिहलें ,
रोजगार के आस में टुनुआ के उजरको बारवा झरवा दिहलें, 
हो गइल उनका कुकुरो के 'बडे' फ़ाइव स्टार में तु बियाह के आस में तवां जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...

एकहु भर्ती सहुर से ना पूरा भइल, 
आइल कोरोना उनका अउरि माजा भइल, 
कुछु होखे धरना प जन जइहअ ना त ल हइ पहिले मास्क खाती थुरा जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...

उनका बिना पढले चानी बा पढ के तोहार दिन जाउ भले मोरी में, 
बेरोजगारन के रोजगार आ गरीबन के पइसा खा गइलें चोरी में, 
उनकर का लेले बाड़अ लाज धोआइल बा हेने ना लही त गते से हे पार्टी से होने डगरा जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...

सरकारी नौकरी चाहीं त बबुआ पहिले एल.एल.बी. करिहअ, 
आरे! परीक्षवा में झोल होइ त आपन केसिया अपने लड़ीहअ, 
तले आही दादा! कुल नौकरीया संविदा प आ गइल सुन के भकुआ जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...

का ए बाबा! नौकरी त नौकरी फ़रमवो भरे खाती तरसा दिहलअ, 
नया नौकरी का देबअ तु त केतनन के पुरनको छोरवा लिहलअ, 
अब गरीबन के आवास आ 'शौचालय' बाचल बा ना होखे त उहो खा जा, 
आ देख के नेता जी के माजा पढलका लागे लागल साजा...

नेहा यादव
गांधीनगर, करम्मर-बलिया

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