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सनबीम बलिया बना जिले का पहला माइक्रोसाॅफ्ट शोकेस सर्टिफाइड स्कूल


बलिया। सनबीम स्कूल बलिया हमेशा से ही नई-नई उपलब्धियां हासिल कर एक अभेद्य बेंचमार्क स्थापित करता आया है। आज जहां संपूर्ण विश्व महामारी की समस्या से जूझ रहा है, वही पूरा विद्यालय परिवार इस विकट आपदा को भी प्रगति के सुअवसर बनाने में जुटा है। पिछले पांच महीने से बेशक विद्यालय में छात्रों का आवागमन  स्थगित है, परन्तु विद्यालय परिवार का हर सदस्य विद्यार्थी से लेकर प्रबंध समिति तक ने निरंतर अपने कठोर प्रदर्शन द्वारा विद्यालय को शीर्ष स्थान दिलाने में प्रतिबद्ध रहा है। ऐसे ही उपलब्धियों के मार्ग में सनबीम स्कूल ने शिक्षण के क्षेत्र में 'माइक्रोसॉफ्ट शोकेस' की वरीयता प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।  
जिले का यह पहला विद्यालय है, जिसने तकनीकी शिक्षण में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़कर शोकेस की वरीयता प्राप्त की। अब सनबीम के छात्र और शिक्षक अब पूरे विश्व के शिक्षा जगत से सीधे जुड़ जाएंगे। इससे पूर्व भी 'फिलाटली क्लब की सदस्यता' तथा 'एनसीसी की मान्यता' प्राप्त करने वाला यह जिले का पहला स्कूल है। विद्यालय की इस उपलब्धि पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष संजय कुमार पांडे, सचिव अरुण कुमार सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसका संपूर्ण श्रेय विद्यालय के शिक्षकों को दिया। 
विद्यालय के निदेशक डॉक्टर कुंवर अरुण सिंह ने कहा कि हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि छात्रों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान समय में विद्यालय बंद होने के कारण शिक्षण का कार्य ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। विद्यालय द्वारा ऑनलाइन शिक्षण जूम के अतिरिक्त माइक्रोसॉफ्ट टीम एप से भी किया जा रहा है। श्री सिंह ने कहा कि आज हमारे सभी शिक्षक पूर्णतया माइक्रोसाॅफ्ट प्रशिक्षित हो चुके हैं। अब माइक्रोसॉफ्ट शोकेस की टीम में शामिल होने के बाद विद्यार्थियों को आधुनिक उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान की जा सकेगी। 21वीं शताब्दी के कौशल प्रदान किए जा सकेंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा ने बताया कि इससे पूर्व भी विद्यालय के सभी शिक्षक माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड शिक्षक घोषित किए गए हैं। माइक्रोसॉफ्ट शोकेस स्कूल बनने के बाद विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थी तकनीकी शिक्षण का लाभ उठा सकेंगे। वर्तमान परिवेश के अनुसार अपना सर्वांगीण विकास कर सकेंगे। श्रीमती सीमा ने इसका श्रेय विद्यालय के समस्त शिक्षकों के कठिन प्रयास एवं विद्यालय प्रबंधन के सहयोग को दिया।

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