इस बात से मर्माहत खड़ग बहादुर ने मांगी न्याय


सिकंदरपुर, बलिया। वन विभाग की जमीन  कब्जा ना हो, इसके लिए प्रयास करना एक समाजसेवी को महंगा पड़ गया है। नगरा पुलिस ने समाजसेवी को पहले शांति भंग के आरोप में हवालात में बंद कर दिया। इससे भी हसरत पुरी नही हुई तो भू-माफियाओं के साथ समाजसेवी व उनके दो भाइयों तथा एक भतीजे पर शनिवार को दलित उत्पीड़न सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इसको लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। पीड़ित ने उक्त प्रकरण में उच्चाधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर नगरा थानाध्यक्ष पर आरोप लगाया है।

सिकन्दरपुर तहसील के गौरा मदनपुरा गांव में निवासी खड़ग बहादुर यादव ने भेजे शिकायती पत्र में लिखा है कि 'पिछले दिनों वन विभाग की जमीन को भू-माफियाओ द्वारा पक्का निर्माण किया जा रहा था। इसकी शिकायत समाजसेवी खड़क बहादुर यादव उप जिलाधिकारी सिकन्दरपुर को लिखित रूप से किया। उपजिलाधिकारी द्वारा पत्रावली  का परीक्षण करने के बाद वन विभाग व थाना नगरा को उस समय सरकारी जमीन पर कब्जा होने से रोकने का निर्देश जारी किया गया। 

उस समय डीएफओ बलिया द्वारा भी थानाध्यक्ष नगरा को जमीन कब्जा करने वाले लोगों को रोकने संबंधी निर्देश दिया गया। लेकिन नगरा पुलिस निर्माण कार्य रोकने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद समाजसेवी खड़क बहादुर यादव उपजिलाधिकारी सिकन्दरपुर का आदेश लेकर थाना नगरा पहुंचे तो थानाध्यक्ष ने उनकी एक बात नही सुनी और समाजसेवी को ही हवालात में डाल दिया। इस बीच, उपजिलाधिकारी के निर्देश पर वन विभाग के रेंजर अभय कुमार सिंह ने निर्माण कार्य को रोक दिया। वही निर्माण कार्य कर रहे गौरा मदनपुरा निवासी लोगों से लिखित रूप से ले लिया कि जब तक जमीन की पैमाइश नहीं होगी, कोई भी निर्माण कार्य नहीं करेंगे।  

बावजूद उनके द्वारा निर्माण कार्य किया जाता रहा। इसी दौरान उप जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम द्वारा पैमाइश की गई। पैमाइश टीम द्वारा वन विभाग के साथ-साथ एक अन्य काश्तकार की जमीन पर अवैध कब्जा होना पाया गया। इसकी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी सिकन्दरपुर को सौंपी गई। इसके बाद उप जिलाधिकारी ने अवैध निर्माण को रोक दिया। लेकिन भू माफिया पुलिस के साथ मिलकर आखिरकार मकान को लिंटर तक पहुंचा दिए। इससे परेशान होकर काश्तकार रामाकांत पुत्र रामविलास ने 18 जुलाई को मुख्यमंत्री सहित पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर आत्मदाह करने की इजाजत मांगी। 

इसके बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। इससे भू माफिया मकान की छत को लिंटर नहीं करा सके, लेकिन शुक्रवार को उन्होंने वन विभाग व काश्तकार की जमीन को जोतकर धान बोने की कोशिश शुरू कर दिया। काश्तकार ने इसका विरोध किया तो भू माफियाओं ने उसकी पिटाई कर दी। काश्तकार द्वारा इसकी सूचना 112 नंबर पुलिस को दी गयी। आरोप है कि इसी को लेकर नगरा एसएचओ काफी नाराज हो गए और अंततः भू माफियाओं के साथ मिलकर समाजसेवी व उनके दो भाई तथा एक भतीजे पर दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कर दिया। पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। 

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