सुशांत की पहल : 'बलिया बिट' पेज पर Live अंशु राजपूत ने बताया अपने दो चेहरे का राज



बलिया। 'बलिया बिट' पेज पर रविवार को एक ऐसी शक्सियत लाइव थी, जो इस बात को सच साबित करने में सफल है कि 'तेजाब से हौंसले नहीं जलते।' यह एसिड अटैक सर्वाईवर कोई और नहीं, अंशु राजपू है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के एक छोटे गांव की रहने वाली अंशु राजपूत ने कई अनसुलझे सवालों का जबाब बड़ी शालीनता से दिये। 

फेसबुक पर इस लाइव का संचालन बलिया के बसुधरपाह निवासी सुशान्त पाण्डेय ने किया। अंशु राजपूत से उनके ऊपर हुए अटैक से जुड़े सवाल पुछे। अंशु ने सभी सवालों का जवाब दिये। बोली, जब वह 15 साल की थी, तभी उन पर अटैक हुआ था। यह अटैक एक 55 साल के अधेड़ ने किया था। वह उनका पीछा करता था। विरोध करने का परिणाम यह हुआ कि एक दिन रात को परिवार के साथ घर में सो रही थी, तभी उनके चेहरे पर एसिड फेंका और उनका पूरा चेहरा जल गया। प्राथमिक उपचार सही से न होने के कारण उन्हें अपनी एक आंख गंवानी पड़ी और बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि परिवार का साथ मिला। परिवार ने इलाज कराया और उनके हौंसले को एक नई ताकत दी।

अंशु की शिक्षा भी नहीं हो पायी और उन्होंने इस अपराध के खिलाफ केस लड़ा। अन्ततः जीत हासिल किया। अंशु समाज की विभिन्न बाधाओं को तोड़ते हुऐ आगे बढ़ी और आज अपने साथ अपने परिवार का सहारा भी है। अंशु वर्त्तमान में लखनऊ में 'शिरोज हैंगाऊट कैफे' मे काम करती है, जो विशेष एसिड अटैक सर्वाईवर्स द्वारा ही चलाया जाता है। अंतिम संदेश के रूप उन्होंने बलिया वासियों से कहा कि हमें गलत का विरोध हमेशा करना चाहिए। लड़कियों तथा महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। अंशु ने कहा कि अब उनका सपना एक मोटीवेशनल स्पीकर बनकर अपनी कहानी सभी लोगों तक पहुंचाना और जागरूक करना है। संचालन कर रहे सुशान्त पाण्डेय ने भी बहुत सारी बातें शेयर की।  अन्य एसिड अटैक सर्वाईवर्स के बारे में जानकारी दी। सुशांत ने उन सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया, जो लाइव कार्यक्रम से जुड़े थे।

जो हुआ गलत हुआ, लेकिन इससे मेरे हौंसले नहीं टूटे, क्योंकि सबके पास एक चेहरा होता है। मेरे पास दो चेहरे है। एक अटैक के पहले एक अटैक के बाद। दोनों की अपनी कहानी है, जो मुझे साहस और जीने का जुनून देती है।
                     अंशु राजपूत, सर्वाईवर

समाज में अच्छाइयों के साथ बुराईयां भी बहुत सारे अभिशाप है, लेकिन एसिड अटैक सबसे घिनौना कृत्य है। इस तरह की मानसिकता का विरोध हम हमेशा करेंगे, परिणाम चाहे जो भी हो।
                              सुशान्त पाण्डेय


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