बलिया : प्रवासियों को झेलनी पड़ रही प्रशासनिक उदासीनता की मार


बैरिया, बलिया। तहसील क्षेत्र में आने वाले प्रवासी मजदूरों को कोरोना महामारी की मार के साथ-साथ यहां प्रशासन की उदासीनता भी झेलनी पड़ रही है। उप-जिलाधिकारी सुरेश कुमार पाल को एक मांगपत्र सौंपा। इसमें कोरोना महामारी के चलते बैरिया तहसील के विभिन्न गांव में पलायन से वापस लौटे प्रवासी मजदूरों व गावों में कोरोना से प्रभावित परिवारों तक कोरोना (लॉकडाउन) की विशेष योजनाओं की लाभ नहीं पहुंचा।

इब्राहिमाबाद उपरवार के जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी अजय कुमार यादव वाड नंबर एक के मजदूरों के साथ ज्ञापन सौंपा। साथ ही बाहर से आये गरीब 334 प्रवासी मजदूरों को राशन दिलाने का मांग किया। यहां उप्र प्रदेश शासन के आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है। बैरिया तहसील क्षेत्र में आने वाले प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन सेंटर से घर भेजे जाने के दौरान 15 दिन का राशन मुहैया कराने के शासन के आदेश कागजों में ही सिमट कर रह गए हैं। अन्य प्रांतों से आने वाले कामगारों को न तो आर्थिक मदद मुहैया कराई जा रही और न ही खाद्य साम्रगी का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि शासन स्तर से खाद्य साम्रगी उपलब्ध कराने के निर्देश व बजट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है।

कोरोना महामारी में लॉकडाउन के दौरान अन्य प्रांतों व जिलों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए शासन स्तर से राशन किट व धनराशि मुहैया कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्वारंटीन सेंटर से घर जाने वाले श्रमिकों को 15 दिन का राशन मुहैया कराया जाए। यहां इन आदेशों को दरकिनार कर प्रवासी मजदूरों के हकों को दबा दिया गया है। प्रवासी 343 मजदूरों इब्राहिमाबाद उपरवार की मानें तो न ही उन्हें राशन किट मिली है और न ही कोई आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है। पूना, गुजरात, दिल्ली से लौटने के बाद हमें कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था। वहां से 6 दिन बाद घर भेजा गया। हमें कोई भी राशन किट और आर्थिक मदद मुहैया नहीं कराई गई।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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