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काश ! पूरा हो जाता इस रिंग बांध का कार्य


बैरिया, बलिया। शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बीएसटी बंधे के उस पार लगभग 50 हजार की आबादी को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान नहीं किया जा सका। आज भी यह परियोजना खटाई में पड़ी है।

बताया जा रहा है कि जब बीएसटी बंधे का निर्माण कार्य चल रहा था, उस समय बंधे से अछूता गांव सारंगपुर, सुरेमनपुर, लगन टोला, सेमरिया, शिवपुर कपूर दियर, जगदीशपुर, दामोदरपुर, गड़ेरिया, हृदयपुर, मुरारपट्टी, भुसौला आदि गांवों के लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री स् चंद्रशेखर से मिलकर बाढ़ से गांवों की सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया।

पूर्व प्रधानमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि पूरा तो नहीं ज्यादातर बस्तियों को रिंग बंधा बनाकर बाढ़ से सुरक्षा प्रदान किया जाएगा। इसके लिए कार्य विभाग से आरंभ करने का भी निर्देश दिया। लगभग दो साल बाद रिंग बंधे का निर्माण लच्छू टोला गांव के सामने आरंभ हो गया। निर्माण से पूर्व सर्वे कराकर करीब 95 प्रतिशत काश्तकारों को मुआवजा भी शासन द्वारा प्रदान किया। किंतु कुछ काश्तकारों ने रिंग बंधे का विरोध करते हुए कार्य को रोक दिया। तब से आज तक रिंग बंधा आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। 

रिंग बंधे की हालत यह है कि जगह-जगह लोग काटकर वहां के मिट्टी घर लेकर चले गए। विभिन्न विभागों द्वारा भी बंधे को काटकर सड़क का निर्माण भी कर दिया गया। रिंग बंधा अधूरा होने के कारण हजारों परिवारों को लाखों की क्षति हर वर्ष बाढ़ के समय में उठानी पड़ती है। क्षेत्रीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि उक्त रिंग बंधे को पूरा कर बाढ़ से प्रभावित हजारों परिवारों को सुरक्षा प्रदान कराया जाय।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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