बलिया में पुरानी राह पर बाढ़ विभाग, दहशत में हजारों की आबादी


बैरिया, बलिया। नौरंगा को गंगा की कटान से बचाने के लिए लगभग 9 करोड़ की लागत से शुरू हुआ कटान रोधी कार्य अन्य कटानरोधी कार्यों की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा। इस अंदेशा के साथ ग्रामीणों ने कटान विरोधी कार्य में घोर अनियमितता का आरोप लगाते हुए बाढ़ खंड के अधिकारियों पर सरकारी धन के लूट खसोट व बंदरबांट का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ खंड का असल उद्देश्य सरकारी धन का लूट करना है, न की गंगा पार के गांव नौरंगा को कटान से बचाने का ?

उल्लेखनीय है कि 9 करोड़ रुपए की लागत से 11 मई को यहां कटान रोधी कार्य शुरू कराया गया था। तब लोगों को यह बताया गया था कि पारकोपाइन विधि से शुरू कराया गया कटान विरोधी कार्य 15 जुलाई तक पूरा करा दिया जाएगा। किंतु कार्य में लापरवाही, शिथिलता के कारण अभी तक 25 प्रतिशत भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीण आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि अगर कटान तेज हुआ तो नौरंगा को भारी नुकसान पहुंचेगा। ग्रामीणों के अनुसार जुलाई में अब तक गंगा का जलस्तर कभी इतना नहीं बढ़ा था, वही अनवरत हो रही बारिश कोढ़ में खाज बन गयी है। 

ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर बाढ़ विभाग गंगा का जलस्तर बढ़ने के इंतजार में था, ताकि कटान रोधी कार्य के नाम पर लूट खसोट किया जा सके। ग्रामीणों ने पारकोपाइन खंभों में मानक के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। कहा कि जमीन पर गिरने पारकोपाइन के खंभे टूट जा रहे हैं, वह नदी का धारा कैसे रोकेंगे। वहीं पारकोपाइन के तल में गिट्टी, बालू व मिट्टी आदि नहीं भरे जाने के कारण नदी के धारा के हल्के प्रवाह में ही जल समाधि ले ले रहे हैं। ऐसे में कैसे नौरंगा बचेगा यह यक्ष प्रश्न है।

कटानरोधी कार्य में मानक के उल्लंघन नहीं हो रहा। गंगा में अधिक पानी हो जाने के कारण कार्य रोकना पड़ा है। गंगा का जलस्तर कम होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। नौरंगा को फिलहाल कटान से कोई खतरा नहीं है।
प्रशांत कुमार गुप्ता, अवर अभियंता 


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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