...आखिर क्यों कमजोर पड़ी शिक्षक संगठनों की जमीन ? बता रहे बलिया के विनोद सिंह


बलिया। निश्चित रूप से यह मन्थन का विषय है कि, प्राथमिक शिक्षक संघ जिसको प्रबुद्धजनों का एक सशक्त दृढ़ और संख्याबल के अनुसार सबसे बड़े और ताकतवर संगठन के रूप में जाना जाता है। उसका शीर्ष नेतृत्व आज इतना प्रभावहीन कैसे हो गया ? जिस शिक्षक संगठन के जुड़ जाने से अन्य संगठनों का आन्दोलन भी ताकतवर और प्रभावशाली हो जाता था, आज वही संगठन अपने अस्तित्व की लड़ाई भी नहीं लड़ पा रहा है। आखिर कुछ ही समय में प्राथमिक शिक्षक संघ किस करवट बैठ गया और क्यों ? वे कौन लोग हैं जिनके कारण चट्टानी एकता और दृढ़ता के लिए जाना जाने वाला प्राथमिक शिक्षक संघ आज छिन्न भिन्न और प्रभावहीन होकर अपने अस्तित्व की अनुभूति तक नहीं करा पा रहा है ?

प्राथमिक शिक्षक संघ के आज के वर्तमान जीर्णावस्था के लिए विगत शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं का स्वजन मोह और वर्तमान नेतृत्वकर्ताओं का मिथ्याभिमान और पदलोलुप होना मूल कारण है। किसी भी संगठन या परिवार के नेतृत्वकर्ता को स्व के भाव का, मिथ्याभिमान का, स्वजनों के प्रति आशक्ति का, पदलोलुपता और मोह का त्याग अनिवार्यतया करना ही पड़ता है। इन अनिवार्य आलम्बनों के अभाव के कारण ही प्राथमिक शिक्षक संघ आज दुर्भिक्ष बनकर अपने हश्र को प्राप्त कर रहा है। इस दुःखद वर्तमान की नींव उसी दिन पड़ गयी थी, जब संगठन के एक विगत शीर्ष नेतृत्वकर्ता ने किसी अपने स्वजन को अपना उत्तराधिकारी बनाने का कुत्सित प्रयत्न किया और शिक्षक संघ बिरखने लगा।

ये दुष्चक्र आगे चलकर प्राथमिक शिक्षक संघ को पदलोलुपता की भेंट चढ़ा गया, जिसके कारण इस विशाल, प्रबुद्ध और अनुशासित संगठन के नेतृत्वकर्ताओं ने अपने-अपने को पदासीन करने के लिए कई गुट खड़े कर लिए। सभी को माला, मंच और महिमामंडन का शौक चर्राया और कोई भी अपने पद और मिथ्याभिमान को त्यागने के लिए तैयार नहीं है। संगठन का शीर्ष नेतृत्व एआरपी चयन के प्रक्रिया का विरोध कर रहा था, आज संगठन के पदाधिकारी स्वयं ही एआरपी बन गए हैं।शीर्ष नेतृत्व ने प्रशिक्षण का विरोध किया और अन्दर की सत्य बात ये है कि संगठन के ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी स्वयं ही प्रशिक्षण की व्यवस्था को चाकचौबंद करने में लगे हैं।

आप सभी समझदार है !
जो व्यक्ति कल तक संगठन के पदाधिकारी होने के नाम पर अपना भिन्न-भिन्न उपार्जन साध्य कर रहे थे, आज वही एआरपी बनकर उन अध्यापकों को मार्गदर्शन प्राप्त कराएंगे जो कल भी प्राथमिक शिक्षा के एक आदर्श थे, और आज भी हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ का शीर्ष नेतृत्व अपने पदाधिकारियों को अनुष्ठान पुरोहित बनने से नहीं रोक पा रहा है, लेकिन इनके आन्दोलन में इनके एक आह्वान पर सभी शिक्षक इनके पीछे खड़े हो जाएं, ऐसी इनकी परिकल्पना है।

विनोद कुमार सिंह
जिला व्यायाम शिक्षक (बेसिक)
बलिया (उ.प्र.)

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