कोरोना शाश्वताखण्ड श्री भगवन्नाम संकीर्तन' से मिलेगी कोरोना से मुक्ति

स्वामी हरिहरानन्द जी महाराज ने प्रतिदिन 18 घण्टे संकीर्तन करने को कहा



बलिया। लाख कोशिशों के बाद भी कोरोना का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में संत महात्मा भगवान के नाम का जाप करने को श्रेयस्कर बता रहे हैं। खपड़िया बाबा आश्रम के स्वामी हरिहरानन्द जी महाराज ने कोरोना से मुक्ति के लिए भक्तों से 'कोरोना शाश्वताखण्ड श्री भगवन्नाम संकीर्तन' करने को कहा है।

शनिवार को सुबह शहर के आवास-विकास कालोनी स्थित हनुमान मंदिर पर कुछ देर के लिए आए स्वामी हरिहरानन्द जी महाराज ने कहा कि कोरोना ने पूरे विश्व में तबाही मचा रखा है। इसके कारण बड़ी-बड़ी संस्थाएं निष्क्रिय हो रही हैं। खपड़िया बाबा परिवार द्वारा 70 स्थानों पर चल रहे श्री भगवन्नाम संकीर्तन पर भी प्रभाव पड़ा है। 

हालांकि भगवान का नाम मंगलकारी होता है। इसे जपते रहने में खपड़िया बाबा परिवार निष्क्रिय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना का मतलब कोई रोड पर ना निकलें बताया था। उसी के अनुरूप अब खपड़िया बाबा आश्रम परिवार ने 'कोरोना शाश्वताखण्ड श्री भगवन्नाम संकीर्तन' करने का निर्णय लिया है। यह कलियुग में विशेष कारगर सिद्ध होगी। 

स्वामी हरिहरानन्द जी ने कहा कि गांव के 18 व्यक्ति तैयार हो जाएं और आपस में एक-एक घंटे की ड्यूटी निर्धारित कर लें तो 'कोरोना शाश्वताखण्ड श्री भगवन्नाम संकीर्तन' प्रत्येक दिन 18 घण्टे तक आसानी से किया जा सकता है। यह प्रतिदिन प्रातः चार बजे से रात्रि के दस बजे तक चलेगा। संकीर्तन में प्रत्येक एक घंटे में शुरू में हनुमान चालीसा व अंत में भी हनुमान चालीसा का भी पाठ करना है। घर में संकीर्तन करने से इसका शुभ संस्कार बच्चों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। 

स्वामी जी ने कहा कि संकीर्तन के दौरान प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो गज की दूरी पर बैठेगा। क्योंकि शासन के नियमों का पालन करने से व्यक्ति श्रेष्ठ साबित होता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में 'कोरोना शाश्वताखण्ड श्री भगवन्नाम संकीर्तन' होगा, वह घर भी पवित्र होगा। क्योंकि भगवान नाम के जप से मंदिर तो पवित्र हो ही गए हैं। घर भी पवित्र होने चाहिए।

उन्होंने इससे जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि जिस गांव के लोग करेंगे वह पूरा गांव भी शुद्ध होगा। आचरण में शुद्धियां आएंगी तो कोरोना या कोई भी रोग नहीं होगा। इस अवसर पर स्वामी वीरेन्द्र जी, अरविंद सिंह, सुनील तिवारी, मैनेजर यादव, ईश्वर दयाल मिश्र आदि थे।

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