बलिया समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों को भी प्रभावित कर सकता है 'निसर्ग'


बलिया। अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य भूगोलविद् डा. गणेश कुमार पाठक ने अरब सागर से उठने वाले चक्रवातीय तूफान के संदर्भ में बताया कि यदि तूफान अधिक गतिमान एवं प्रभावशाली हुआ तो इसका कुछ न कुछ प्रभाव बलिया सहित पूर्वांचल के जिलों पर भी पड़ सकता है। डा. पाठक ने बताया कि महाराष्ट्र एवं गुजरात के तट से टकराने वाले खतरनाक तूफान 'निसर्ग' का प्रभाव बलिया सहित पूर्वान्चल के अन्य जिलों पर भी पड़ सकता है। बलिया सहित पास- पड़ोस के जिलों में भी आज से ही बादलों का आगमन शुरू हो गया है। 4-5 जून को तेज हवा के झोंकों के साथ कहीं कम तो कहीं सामान्य वर्षा भी हो सकती है। 


काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार अरब सागर से दक्षिणी-पश्चिमी हवाएं तेजी से प्रवाहित होती हुई महाराष्ट्र एवं गुजरात के तटों से टकरा रही हैं और वर्षा भी हो रही है। मुंबई व गुजरात के तटों से निसर्ग तूफान टकराने के बाद यह आगे बढ़ते हुए उत्तरी-पश्चिमी भारत में 4 जून तक व्यापक असर छोड़ सकता है। वायु की गति 100 किलोमीटर से भी ऊपर होने का अनुमान है। इसका प्रभाव बलिया सहित पूर्वान्चल के अन्य जिलों मे भी पड़ना तय है। पूर्वांचल के सभी जिलों में आसमान में बादल छाए हुए हैं।      
                

आगामी एक सप्ताह के मौसम के बारे में मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि शनिवार तक फ़िलहाल मौसम का रुख ऐसा ही रहेगा।वातावरण में नमी होने के कारण हल्की वर्षा भी हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल यूँ ही बने रहेंगे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार रविवार से पुनः मौसम साफ हो जायेगा,सूरज की किरणें फिर से तीव्र होने लगेंगी और एकबार फिर भीषण गर्मी लोगों के लिए कष्टदायक हो सकती है।

20 जून तक मानसून का भी आगमन हो सकता है। 1 जून को केरल में मौसम का आगमन हो गया है और यदि सब कुछ सामान्य रहा एवं मानसून की गति भी सामान्य रही तो रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद यदि मृगदाव (मृगडाह) नक्षत्र में अच्छी तपन हो जायेगी तो 20 जून तक बलिया में भी मानसून आ जायेगा और वर्षा शुरू हो जायेगी। 

जैसा कि कहा भी गया है-
रोहिणी बरसे, मृग तपे।
कुछ-कुछ आर्द्रा जाय।।
कहे घाघ सुन भण्डरी।
श्वान भात न खाय।।

अर्थात् यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिस और मृगडाह नक्षत्र में पर्याप्त तपन हो जाती है तथा आर्द्रा नक्षत्र के कुछ दिन जाने पर अच्छी बारिस हो जाती है तो उस वर्ष धान की खेती इतनी अच्छी होती है कि कुत्ता भी चावल के भात को नहीं पूछता है। अर्थात् चावल के भात से उसका भी पेट भरपूर भरा रहता है।



चित्र स्रोतः सोशल मीडिया, Mousam Nwfc

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