बलिया : बाढ़ से बचाव की इस परियोजना में 'भूगोल' का फायदा उठा रहे ठेकेदार, ग्रामीण नाराज


बलिया। बाढ़, कटान और बचाव... यह तीन शब्द ऐसे हैं, जिस पर अरबों रुपया हर साल खर्च होता है। लेकिन इस खर्च का लाभ एक भी गांव को नहीं मिला। हां, इतना जरूर है कि ठेकेदारों के साथ-साथ कुछ विभागीय अफसर लाभांवित होते रहे है, लिहाजा बचाव कार्य में 'खेल' पर रोक नहीं लग पाती। ताजा मामला बैरिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत गंगा नदी के उस पार स्थित नौरंगा ग्राम पंचायत से जुड़ा है। इस पंचायत को बचाने के लिए लगभग 10 करोड़ की परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन मानक की धज्जियां उड़ाकर। इससे वहां के लोगों में आक्रोश का गुब्बार बढ़ता जा रहा है, जो कभी भी फूट सकता है। 



ग्रामीणों का आरोप है कि बचाव कार्य के नाम पर जो पिलर बनाये और लगाये जा रहे है, उसमें घोर अनियमितता बरती जा रही है। यहां मिक्सर मशीन से नहीं, हाथ से ही जैसे तैसे सीमेंट, बालू और गिट्टी मिलाकर तैयार किये जा रहे पिलर में मानक के मुताबिक छड़ भी नहीं लगाया जा रहा है। रिंग का भी वही हाल है। यही नहीं, प्लेटफार्म निर्माण में काम कम, खानापूर्ति ज्यादे हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लेटफार्म निर्माण में कही मिट्टी निकाली जा रही है तो कही छोड़ दी जा रही है। उनका कहना है कि गंगा के सतह से यदि प्लेटफार्म नहीं बना तो वह लहरों से लड़ने में कारगर नहीं होगा। 



नौरंगा के पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर का कहना है कि शासन की मंशा के अनुसार उक्त परियोजना से जुड़े कार्य का बोर्ड लगना चाहिए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। विभाग और ठेकेदार स्टीमेट तक नहीं बता रहे है। ग्रामीणों द्वारा मना करने के बाद भी मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही है। कहा कि गांव की सुरक्षा के लिए शासन ने अच्छी पहल की है, लेकिन विभागीय मिलीभगत से कार्यदायी संस्था गंभीर नहीं दिख रही। ऐसे में ग्रामीण अब और चुप नहीं रहेंगे। कहा कि कार्यदायी संस्था, इसलिए और बेफिक्र है कि भौगोलिक दृष्टि कुछ अलग होने से विभागीय अफसर हमेशा नहीं पहुंच पाते।


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