Father's Day Special : आसमां चूम रही बलिया की ये सगी बहनें बोली- 'पापा है तो...'


दिमाग में दुनिया भर की टेंशन और दिल में सिर्फ अपने बच्चों की फिक्र, वो शख्स कोई और नहीं वो हैं पिता...। ये पंक्तियां उस महान शख्सियत का बोध कराती हैं, जो अपनी संतान के लिए पूरी जिंदगी न्यौछावर कर देता है। अपने बच्चे को एक अच्छा भविष्य देने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। इस दिशा में माता-पिता को अपने सपनों का बलिदान भी करना पड़े तो वे गुरेज़ नहीं करते। कुछ ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी एक पिता की है, जिनके संघर्षो के बदौलत आज बेटियां आसमां चूम रही है...

जिले के बेरुआरबारी ब्लाक अंतर्गत मिश्रवलिया गांव निवासी सुरेश मिश्र एक किसान है। लेकिन अपनी दो पुत्रियों को इन्होंने ऐसी तालीम दिलाई है, जो किसी कहानी की मांनिंद जान पड़ती है। अपने समर्पण व त्याग के दम पर एक बेटी को न सिर्फ वैज्ञानिक बनाया, बल्कि सात समंदर पर यूएसए तक पहुंचा दिया। वही, दूसरी पुत्री भी आईआईटी मुम्बई से पीएचडी कर रही है। 

मजबूत इरादे से हर मुश्किल राह को आसान बनाने वाले सुरेश मिश्र मुद्दतों पहले जिले में एक होटल संचालक के रूप में जाने जाते थे। लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि आय का वह आधार भी समाप्त हो गया। एक पुत्र व तीन पुत्रियों के पिता के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ खड़ा था। फिर भी वे हिम्मत नहीं हारे और गांव आकर खेती व बागवानी में जुट गए। इससे होने वाली छोटी सी आमदनी के सहारे ही बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने में लगे रहे। इसका सुखद परिणाम भी निकला। आज सुरेश मिश्र की एक बेटी डॉक्टर अलकनंदा मिश्र कैलिफोर्निया में इम्यूनॉलजी में रिसर्च कर रही है। वहीं छोटी पुत्री स्मिता मिश्रा आईआईटी मुम्बई से सिस्मोलॉजी में पीएचडी कर रही है।

जनपद के हॉलीक्रास स्कूल से बारहवीं की शिक्षा लेने के बाद बीएचयू से माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी कर अलकनंदा ने पिता के सामने आगे भी पढ़ाई जारी रखने का प्रस्ताव रखा। स्थितियां प्रतिकूल थी, लेकिन सुरेश मिश्र ने बेटी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। जेएनयू से सम्बद्ध एनआईआई (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनॉलजी) की ऑल इंडिया परीक्षा पास कर अलकनंदा ने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर लिया। फिर अमेरिका के कैलिफोर्निया विवि से पोस्ट डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर शरीर की प्रतिरोधक प्रतिरक्षा प्रणाली पर अलकनंदा वाशिंगटन में अनुसंधान कर रही है। 

पापा है तो दुनिया है

डॉक्टर अलकनंदा मिश्र ने बताया कि हमारे पिता ने हम लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। हमारी जिंदगी में सबसे ज्यादा कोई महत्वपूर्ण है तो वह मेरे पिता हैं। तमाम कठिनाइयों के बाद भी उच्चस्तरीय शिक्षा दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। हमारी जिंदगी में अगर कोई भगवान है तो वह मेरे पिता हैं। एक पोषक के रूप में परिवार की रीढ़ बनकर जरुरतें पूरी करते रहे तो वहीं प्रेरक बनकर जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ने का जज्बा भी पैदा किया। आज भी हमलोगों को दशहरें के मौके पर अपने कंधों पर बैठाकर रावण दहन दिखाने ले जाने का वह दृश्य याद है। समय समय पर हर जरूरतों को  पूरा करने वाले पापा ने कभी कभार सख्ती भी दिखाई तो वह बेवजह नहीं थी। 


मेरे लिए ब्रह्मांड से भी व्यापक पिताजी

सिस्मोलॉजी की रिसर्चस्कालर व अलकनंदा की छोटी बहन स्मिता मिश्रा ने बताया कि पिता का अस्ति‍त्व, संतान के लिए ब्रह्मांड से भी व्यापक है।  पापा की खामोशी खुद में कई शब्दों को समेटे रहती है। उनकी हर एक बात में कई सबक छिपे होते हैं। फादर्स डे पर उनके संघर्षों को याद कर संतान का फर्ज  निभाने का संकल्प लेना ही उनके लिए सबसे बड़ा उपहार होगा। कुम्हार की तरह हमदोनों बहनों को बेहतर आकार देने वाले मेरे पिता दुनिया के सबसे अच्छे पिता हैं। उनकी सन्तान होने का हमें फक्र है।

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