बलिया में 'धुरान' के नाम पर शोध केंद्र खोलने की उठी मांग


बलिया। वीरेंद्र सिंह 'धुरान' लोक संस्कृतिक सेवा संस्थान का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कल्पलता पाण्डेय से भेंट कर भोजपुरी के विख्यात कलाकार वीरेंद्र सिंह 'धुरान' के नाम पर शोध/अध्ययन केंद्र खोले जाने की मांग रखी। 

धुरान जी के शिष्य ईश्वरदत्त पांडेय ने बताया कि 'धुरान' जी भोजपुरी के नारदीय के नारदीय शैली एवं चैता गायन के पितामह थे। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अध्ययन एवं शोध होना चाहिए। आज भोजपुरी को तभी आगे बढ़ाया जा सकता है, जब 'धुरान' जी के परम्परा को आगे आगे बढ़ाया जाए। कुलपति ने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय में संगीत विभाग व भोजपुरी विभाग खोलकर 'धुरान' जी जैसे गुनी कलाकारों को महत्वपूर्ण स्थान दिलाया जाएगा। 

प्रतिनिधिमंडल में ग्रामप्रधान विजयप्रताप सिंह, रामदहिन भारती बाबा, अजय प्रताप सिंह, ईश्वरदत्त पांडेय, बंटी पांडेय, अनुज सिंह, विनायक शरण सिंह, राकेश सिंह, उपेंद्र सिंह, आकाश सिंह, सुभाष राम आदि लोग उपस्थित थे। कोरोना महामारी को देखते हुए कई सदस्यों ने अपनी उपस्थिति फोन के माध्यम से दर्ज कराई। इसमे ध्रुव नारायण सिंह, मनोज चौबे, उपेंद्र यादव, अम्बूज सिंह, अंशु सिंह, अश्वनी, आकाश रावत, दुष्यन्त सिंह, तारकेश्वर ठाकुर, सुरेंद्र सिंह, मुक्तेश्वर दुबे, विजय पाठक, मार्कण्डेय गुप्ता, बालवेन्द्र कुमार सिंह आदि शामिल है। 

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