हांसनगर हत्याकांड : ये रिश्ता क्या कहलाता है ?


बलिया। बलिया को यूं तो ऋषि-मुनियों की पावन पवित्र भूमि व वीरों की धरती बागी बलिया के नाम से जाना जाता है, लेकिन इधर बलिया कुछ अपनों के रक्तरंजित रिश्तों की वजह से कलंकित माना जाने लगा है। जी हां, हम बात कर रहे है उस घटना की, जहां खुद के खून ने खुद के खून से होली खेल रिश्तों को रक्तरंजित किया और आत्मग्लानि में (पुलिस कथानुसार) खुद को ही खत्म कर लिया।

जनपद मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर पूरब दिशा में स्थित हल्दी थाना क्षेत्र के हांसनगर का इतिहास यूं तो पौराणिक कथाओं के पन्नो पर दर्ज है। फिर भी बताते चले कि ये वही हंसानगर का अपभ्रंश नाम है, जिसे हम हांसनगर के नाम से जानते है। इस गांव के बारे में अमूमन दो दन्तकथाओं का दर्शन होता है। प्रथम दन्तकथा के अनुसार एक कौवा जब प्यास से व्याकुल हुआ तब वो इसी स्थान पर गंगातट किनारे अपनी प्यास बुझाया। कथा के अनुसार वो कौवा गंगा का निर्जल जल पीते ही 'हंस' में परिवर्तित हो गया।दूसरे कथाओं के अनुसार 'सृष्टि निर्माणकर्ता ब्रह्मा का वाहन 'हंस' विचरते हुए कभी इसी स्थान पर उतरा था, तभी से इस स्थान का नाम हंसानगर पड़ गया। 

सत्यता जो भी हो, लेकिन आज का हांसनगर अपनो के रक्त बहाने के लिए चर्चा में है। घटनाक्रम के अनुसार बीते 9 जून को छोटे भाई द्वारा बड़े भाई और भाभी सहित अबोध भतीजे पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिया जाता है। इसमे भाई और भाभी गम्भीर रूप से घायल हो जाते है तथा अबोध भतीजा मौके पर ही दम तोड़ देता है। फिर तीन दिन बाद उसी हत्यारोपित की लाश समीप के ही गांव परसिया के कुएं से बरामद होती है। पुलिस के अनुसार हत्यारोपी या तो आत्मग्लानि या पुलिस गिरफ्तारी के डर की वजह से कुएं में कूदकर आत्महत्या कर लिया है।

आश्चर्यजनक पहलू यह है कि लोमहर्षक हत्या का हत्यारोपी घटनास्थल से महज चंद कदम की दूरी पर ऐसा कदम उठा लिया और पुलिस को भनक तक नहीं लगी ? मामला चाहे जो कुछ भी हो ये तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा, लेकिन इतना अवश्य है कि इस घटना ने सबकी जुबान पर एक ही सवाल खड़ा किया है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है ?


रवीन्द्र तिवारी

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