बलिया : 'राय साहब' की जिंदादिली के प्रतीक है आपातकाल के कारनामे


बलिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि 10 जून 1924 को करनई में जन्में गौरी शंकर राय का शुरू हुआ राजनीतिक सफरनामा मजदूर और किसानों की पीड़ा का वह दस्तावेज है, जिसमें सामंती तथा खूनी साम्यवादी विचारधारा के अंत का संदेश है।वस्तुतः गौरी शंकर राय प्रगतिशील समाजवादी योद्धा थे। 
भारतीय सद्भावना मिशन मिश्र नेवरी स्थित कार्यालय पर आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए डॉक्टर राय ने कहा कि जेल की सिकचो में बंद इस योद्धा ने सन 42 की क्रांति सदेह देखा और उसे भोगा था। आपातकाल के कारनामे उनकी जिंदादिली के प्रतीक हैं। त्याग, तपस्या और संघर्षों से सदेह जुड़े राय साहब महामानव थे। राजनीतिक जीवन में सुचिता के पक्षधर गौरी शंकर राय अपराध और अपराधियों के प्रबल विरोधी, जमीन से जुड़े समर्पित शिक्षक, शिक्षाविद और पाल्र्यामेंटरियन के स्प में सदैव याद किये जायेंगे। आम जनता की पीड़ा को समझने और मुक्ति के लिए प्रयासरत राय साहब लोकतंत्र के अद्भुत मसीहा थे। इस मौके पर श्रीप्रकाश मिश्र, श्रीनिवास यादव, अक्षयवर ओझा, अशोक पांडेय, टुनटुन उपाध्याय इत्यादि मौजूद रहे।

आपने हमेशा मूल्य आधारित राजनीति की 

स्व. गौरी शंकर राय के 97वीं जयंती पर गौरी शंकर राय कन्या महाविद्यालय करनई में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि राय साहब का पूरा जीवन समाज के कमजोरों को समर्पित रहा। वे किसान मजदूरों के हक के लिए हमेशा लड़ते रहे। पूर्व विधायक सुधीर राय ने कहा कि आपने हमेशा मूल्य आधारित राजनीति की और गरीबों की बात की।  श्रद्धांजलि सभा को पूर्व प्रमुख शारदानंद राय, गिरजा शंकर राय, परमात्मा नंद पांडे, उमाशंकर शुक्ल, राजकुमार पांडे एडवोकेट, कमल किशोर राय, विनोद कुमार राय आदि ने संबोधित किया। समस्त आगंतुकों का स्वागत प्राचार्य डॉ एसके सिंह ने किया। अध्यक्षता सेनानी रामविचार पांडे व संचालन धनंजय राय ने किया। महाविद्यालय के प्रबंधक वीरेंद्र राय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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