बलिया में लावारिश पड़ी लालबत्ती और हूटर लगी चार 'जहाज', क्या हैं राज


बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में सरकारी सिस्टम के सुप्तावस्था से गायघाट कुआं नम्बर एक से दक्षिण दिशा में लाखों का मोटरबोट कबाड़ में तब्दील हो चुका है। इनकी संख्या एक-दो नहीं, बल्कि चार है। इसकी कीमत भी लाखों में होगी।लेकिन इसकी परवाह सम्बंधित विभाग को भी नहीं है। हो भी क्यों, उसकी पगार तो खरी है।खामियाजा तो आम आदमी को भुगतना पड़ता है, क्योंकि भारी-भरकम टैक्स का भार तो आम आदमी पर है।



विदित हो कि राष्ट्रीय राज्य मार्ग-31 के गायघाट कुआं नम्बर एक के समीप कई वर्षों से लगभग 4-5 मोटरबोट लावारिसों की तरह पड़ा हुआ है। सभी पर लालबत्ती और हूटर लगा है। इनमें से तो दो ऐसे छोटे मोटरबोट है, जो अत्याधुनिक बचाव-राहत के साजो-सामान से परिपूर्ण है। सम्भवतया यह मोटरबोट बाढ़ की विभीषिका में  ग्रामीणों के  बचाव व राहत के लिए ही आया होगा। कुछ लोग तो यह भी बताते है कि जलमार्ग के समय कुंआ नम्बर एक (गायघाट) स्टेशन भी था, जिसे जहाज घाट कहा जाता है।



संसाधनों के अभाव का रोना रोने वाले सम्बंधित विभाग पर यहां सवालिया निशान है कि आखिर ये मोटरबोट कैसे कूड़े में तब्दील हो गया। सूत्रों की माने तो इस मोटरबोट के संचालन के लिए चार चालक दल का स्टाफ था, जो कि अब सेवानिवृत्त हो चुका है।


इन चालकों की सेवानिवृत्ति के पश्चात किसी अन्य का नियुक्ति न होने से ये मोटरबोट वीरान से हो गए और धीरे-धीरे कबाड़ हो गया। इनमें से तो कुछ की हालत देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि ये जब से आये है, तब से शायद ही कभी स्टार्ट करके ट्रायल भी हुआ होगा।


बलिया से रवीन्द्र तिवारी की खास रिपोर्ट

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