बलिया : रेड क्रॉस की इस पहल को सभी ने सराहा, SDM ने की प्रशंसा


बलिया। कोरोना संक्रमण के चलते पूरा भारत वर्ष लॉक डाउन में चल रहा है। तीसरा चरण शुरू हो चुका है। आगे क्या होगा ये भविष्य की बात है, लेकिन जिला प्रशासन से लगायत समाज सेवी संस्थाओं ने हर सम्भव कोशिश किया है कि किसी प्रकार की कहीं परेशानी न आए। इसके लिए जगह-जगह राशन मुहैया कराए जा रहे हैं, जो जहां है दिक्कत में है। इसमें वह समाज भी समाज भी शामिल है, जो घर-घर जाकर हमारे-आपके लिए खुशी की गुहार लगाता है। बधाई गाता-बजाता है, जिसे हम किन्नर कहते हैं। घरों में रहकर इन्हें भी अब भोजन पर आफत आने लगी है। 

इसकी जानकारी रेडक्रॉस सोसाइटी और बैजनाथ गुप्ता रौनियार (भूटान वाले) को जैसे ही मिली, किन्नरों को राशन उपलब्ध कराने पहुंच गए। SDM सदर अश्विनी कुमार श्रीवास्तव भी साथ रहे। उन्होंने किन्नरों में राहत सामग्री का वितरण किया। एसडीएम अश्विनी कुमार ने कहा कि रेड क्रॉस सोसायटी अपने उद्देश्यों में सफल है। कोरोना महामारी में लगातार सहयोग दिया है। 52 किन्नरों को राशन दिया गया, जिन्हें परेशानी थी। 

उन्होंने कहा कि मानवीय जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के मिशन के साथ वर्ष 1863 में स्थापित किये गये संगठन रेड क्रॉस अपने वालेंटियर वर्क यानी स्वयंसेवा के लिए जाना जाता है। उन्होंने बलिया रेड क्रॉस टीम को शुभकामना दिया। साथ ही बैजनाथ गुप्ता रौनियार (भूटान वाले) के सहयोग का भी प्रशंसा किया।



भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना 1920 में 

रेडक्रॉस सोसाइटी के कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में रेड क्रॉस की अहम भूमिका रहती है। चूकि फंड की कमी है। जितना अभी किया जा रहा है, टीम भावना के साथ सदस्यों के सहयोग से इतना सेवा हो रहा है। श्री पांडेय ने कहा कि भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी का स्थापना वर्ष 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के अनुसार की गई।

भारत में रेडक्रॉस सोसाइटी की सात सौ से भी अधिक शाखाएं हैं। उक्त सोसाइटी के सिद्धांतों को मान्यता साल 1934 में 15वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिली, जिसके बाद इसे दुनिया भर में लागू किया गया। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा में है। इस संस्था को साल 1917, 1944 और 1963 में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है। इसकी स्थापना हेनरी ड्यूडेंट ने की थी, जिनका  जन्म आठ मई को ही हुआ था। इसलिए हर साल आठ मई को रेड क्रॉस दिवस मनाया जाता है। 

यह संस्था युद्ध और शांति के समय दुनियाभर के देशों की सरकारों के बीच समन्वय का काम करती है। इसका मुख्य कार्य मानव सेवा है। आज किन्नर समुदाय को राशन मुहैया कराना हमारा फर्ज बना। समाजसेवी व रेडक्रॉस के सदस्य संजय कुमार गुप्त, सदस्य श्याम जी रौनियार ने कहा कि कोरोना महामारी काल में रेड क्रॉस की भूमिका इस सोसाइटी का नारा है- अपने अन्दर के स्वयं सेवक को पहचानें। मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, सार्वभौमिकता एवं एकता जैसे सिद्धांतों पर कार्यरत इस संस्था की भूमिका कोरोना संकट के दौर में और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। क्षमता के अनुसार हम तत्पर हैं।

ऐसी महामारी में बढ़-चढ़कर सहयोग देना चाहिए: भूटान वाले

इस दौरान बैजनाथ गुप्ता रौनियार (भूटान ) ने कहा कि इस तरह की महामारी में कोई भी इसमें बढ़चढ़ सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि  रेडक्रॉस सोसाइटी के साथ मुझे भी सेवा का अवसर प्रदान हुआ। अच्छा लगा।

सौभाग्य है हमें ऐसा पीएम मिला : किन्नर अनुष्का चौबे: अन्नू

कोरोना संक्रमण की त्रासदी को पूरा देश झेल रहा है। वहीं बलिया के किन्नर अनुष्का चौबे 'अन्नू' ने कहा कि सौभाग्य हम हम भारतीयों की कि हमें ऐसा पी एम नरेंद्र मोदी जी मिले हैं। जो विश्व पटल पर अलग पहचान कायम रखें हैं। कोरोना से जहाँ विश्व परेशान हैं वहीं हमारे प्रधानमंत्री जी ने पूरा भारत में लॉकडाउन कर  घरों में रहकर कोरोना जैसे बीमारी से बचने का मंत्र दिया। यही वजह है कि दुनियां भर के देशों से हम भारतीय अभी अच्छे जा रहे हैं। भले ही हम कष्ट झेल लेंगे, लेकिन घरों में ही रहेंगे। देश वासियों से भी यही निवेदन है कि घर में रहकर देश हित में अच्छा काम किया जाय। लॉकडाउन का अनुपालन किया जाय। इस अवसर पर टीडी कॉलेज के संगीत एसोसिएट प्रोफेसर अरविंद उपाध्याय, डॉ पंकज ओझा, विनय कुमार श्रीवास्तव, सतेन्द्र कुमार राय, विजय शर्मा इत्यादि उपस्थित रहे।

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