मुझे खुद पर गर्व है : पत्रकारिता निष्ठा के साथ करते हैं, उंगलियां तो कोई उठा सकता है...



आज 30 मई पत्रकारिता दिवस है। वर्तमान समय में पत्रकारिता करना आसान नहीं। जी हां, पत्रकारिता में पत्रकारों पर स्वामित्व का सबसे बड़ा दबाव है। पत्रकारिता को चतुर्थ स्तम्भ के रूप में जाना जाता है, जिसमें सम्पादक की अहम भूमिका होती है। पत्रकारिता को एक पवित्र उद्देश्य वाला व्यवसाय माना जाता है। परंतु वर्तमान समय में सम्पादक की भूमिका कम हुई है, क्योंकि अब सम्पादक पद मालिक ही सुशोभित कर रहे हैं। अगर सम्पादक नियुक्त भी किया जाता है तो उसका अधिकार अंदरखाने में सीमित कर दिया जा रहा है। खबरें एंड्राइड फ़ोन की वजह से भले ही हम सब पढ़ लेते हैं। परंतु डिटेल्स अखबार में ही पढ़ने को मिलता है। आज अखबार के संचालक जो चाहते हैं, वही जनता तक पहुंच पाता है। विज्ञापन कह लें या अर्थोपार्जन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया है। 

आज के दिवस पर लिखने को बहुत कुछ मन में आ रहा

जनहित के प्रहरी पत्र शासक को झकझोरते हैं। उन्हें नाराज करते हैं। उनकी नींद हराम होती है। फलतः पत्रकारों का एक वर्ग स्वतंत्र है। कहीं कहीं पत्रकारों की हैसियत बंधुआ मजदूरों की तरह है। पत्र मालिकों के नुकसान की चिंता तथा अंध विश्वासों में जनता की अनुरक्ति के कारण पत्रकारों की अभिव्यक्ति बाधित होती है।

पत्रकारिता एक पावन अनुष्ठान

लिखने में कोई संकोच नही, चौथा स्तम्भ में हम पत्रकार आते हैं। आरोप लगाना आसान है। लेकिन निष्ठा के साथ काम करना एक अलग पहचान जरूर होता है। पत्रकारिता वाकई एक पावन अनुष्ठान है, जिसमें समाज के प्रति शुभेक्षु सहृदय की भूमिका ही  वरेण्य होती है। कर्म की नैतिक आधारों की अनुपस्थिति में पत्रकार सम्मानित नहीं  होता। आत्म निरीक्षण, आत्म नियंत्रण और आत्म गौरव के विकास से ही पत्रकार सम्मानित होगा। और उसकी पत्रकारिता गौरव दीप्त होगी। मूल्यों पर निर्मम प्रहार से ही मुक्त हिंदी पत्रकारों को अपनी उज्ज्वल परम्परा से जुड़ना होगा। लोकनायक की भूमिका निभानी होगी। निश्चित ही हम हिंदी पत्रकारिता को आगे बढ़ाएंगे। इन्ही शब्दों के साथ पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...


नरेन्द्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार बलिया

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