Home » बेबाक साहित्य धारा » कुशीनगर हादसा: मेरे जाने से हौंसला मत खोना मां, मुझसे बिछड़ कर मत रोना मां

कुशीनगर हादसा: मेरे जाने से हौंसला मत खोना मां, मुझसे बिछड़ कर मत रोना मां

कुशीनगर में 13 बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर कवियों की मार्मिक रचनाएं वायरल हो रही है। एक और कविता Purvanchal 24.com के पास पहुंची है, जिसे अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

मां काश आज मैं स्कूल न जाता, शायद तुम्हे फिर से देख पाता, तेरी आवाज सुनने को कान तरस रहे हैं। टिफिन में दी तुम्हारी रोटी भी नही खायी थी। पापा से कहना अब हमें स्कूल लेने न आये, देख नही पाऊंगा उन्हें। मेरा जनाजा उठाये हुए मेरे जाने से अपना हौसला मत खोना मां, मुझसे बिछड़ कर मत रोना।
मां मेरे खिलौने, मेरी किताबे, मेरा बस्ता, जानता हूं तेरी आंखे देखेंगी मेरा रास्ता। भैया से कहना उसका साथी रूठ गया। बचपन का हमारा साथ छूट गया। दीदी से कहना मेरे लिए आंसू न बहाये, रोज मेरी तस्वीर को छोटा सा फूल चढ़ाये। तेरी यादों में ख्वाबो में तेरे जिक्र में रह जाऊंगा। मां अब मैं कभी वापस नही आउंगा।
मां अब मैं कभी वापस नहीं आऊंगा।

ईश्वर इन नन्हे फरिश्तों को मोक्ष प्रदान करें!

schoolchildrenaccident

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