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‘संकल्प’ की डायरी में यह बात लिख गये थे केदार नाथ सिंह

बलिया। संकल्प के रंगकर्मियों से गहरा लगाव था प्रो. केदार नाथ सिंह का। 2009 अपने बलिया आगमन के दौरान संकल्प के मिश्र नेवरी स्थित कार्यालय पर आये। रंगकर्मियों से मिले। बलिया में रंग मंच की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। संकल्प के विजिटिंग डायरी पर लीखे कि “संकल्प संस्था को और उसकी बहुविध गतिविधियों की रपट देखी और प्रभावित हुआ। बलिया में ऐसी युवा संस्था की बड़ी आवश्यक्ता थी। यहां उपस्थित युवा चेहरे को देख कर एक नयी रचनात्मकता का परिचय मिला। मैं इस बार की बलिया यात्रा में इस अनुभव को अपनी सुखद उपलब्धि मानता हूं। अवसर मिला तो पुन: यहां आना चाहूंगा और सम्भव हुआ तो बार बार…।” केदार जी की सहजता और सज्जनता के कायल युवा रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने दुखी मन से कहा कि केदार जी के जाने से हिन्दी साहित्य ही नह़ी, बल्कि विश्व साहित्य की क्षति हुयी है। बलिया के चकिया से निकल कर विश्व स्तर पर कविता को स्थापित करने वाले कवि जब भी मिलते, हमें प्रोत्साहित करते रहते थे। अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्व विद्यालय में संकल्प की प्रस्तुति को देख कर जब उन्होंने कहा कि “मंच से बलिया बोल रहा था” हमारी प्रस्तुति को मिले अब तक का सबसे बड़ा उपहार था। केदार जी की रचनाओं में ही नह़ी, बल्कि उनकी आत्मा में बलिया, बलिया के लोग और यहां की मिट्टी की खुशबू विद्यमान थी। केदार जी की स्मृति को प्रणाम करते हुए आशीष त्रिवेदी ने कहा, बहुत जल्द संकल्प उनकी कविताओं की रंग प्रस्तुति से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।

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