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परिषदीय शिक्षा को ‘बुलंद’ कर रही बलिया की शिक्षिका ने ‘कल से सीखो आज में जियो’ की तर्ज पर मनाया इस शख्स का Birthday

कल से सीखो आज में जियो, और कल के लिए आशा रखो, बस प्रश्न करते रहो
अल्बर्ट आइंस्टीन

सबसे पीछे रहने वाले एक बालक ने अपने गुरु से पूछा ‘श्रीमान मैं अपनी बुद्धी का विकास कैसे कर सकता हूँ?’
अध्यापक ने कहा – अभ्यास ही सफलता का मूलमंत्र है।
उस बालक ने इसे अपना गुरु मंत्र मान लिया और निश्चय किया कि अभ्यास के बल पर ही मैं एक दिन सबसे आगे बढकर दिखाऊँगा। बाल्यकाल से अध्यापकों द्वारा मंद बुद्धी और अयोग्य कहा जाने वाला ये बालक अपने अभ्यास के बल पर ही विश्व में आज सम्मान के साथ जाना जाता है। इस बालक को दुनिया आइंस्टाइन के नाम से जानती है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी मेहनत, हिम्मत और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है।
“टाइम पर्सन ऑफ़ द सेंचुरी” और जीनियस का पर्याय माने जाने वाले महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भौतिक विज्ञान में अपने अमूल्य योगदान के लिए जाए जाते हैं. उनके द्वारा बनाया गया equation, E=MC^2; दुनिया का सबसे प्रसिद्द समीकरण है।
प्रावि हरिहर नगर, बेरुआरबारी, बलिया के बच्चे महान वैज्ञानिक अौर विचारक अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारो से अछूते न रह जाये। इस सोच के साथ शिक्षिका श्वेता सिंह ने अल्बर्ट आइंस्टीन के जन्मदिवस पर बच्चों को उनके जीवन परिचय, विचार, योगदान के बारे मेें बताने का प्रयास किया गया। बच्चों की रूचि बढ़ाने के लिये एक बच्ची को आइंस्टीन बनाया गया।ब च्चों ने उनके चित्र बनाये तथा पुष्प अर्पित किया। बच्चों ने उनके विचारों को अपनाने का वादा किया।

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