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मां अन्नपूर्णा के दर्शन संग दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व शुरू, ऐसा है महात्म्य

वाराणसी। उत्साह उमंग आस्था विश्वास और धर्म व आध्यात्म की महान नगरी काशी में दीपोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार से हो रहा है।हर वर्ष पौराणिक काशी नगरी में दीपोत्सव के पांच दिवसीय महापर्व की शुरूआत माता अन्नपूर्णा के दर्शन और अन्न धन के महाप्रसाद के साथ ही होती है।

पूरे साल सभी को रहता है इंतजार

साल में सिर्फ़ एक बार ही केवल धनतेरस के दिन से अगले चार दिनों तक के लिए मां अन्नपूर्णा के स्वर्ण मयी दिव्य प्रतिमा के दर्शन का लाभ भक्तों को मिलता है। सबसे अहम बात यह है की इस दौरान वितरित किये जाने वाले अन्न-धन के विशेष प्रसाद के लिए लाखों की संख्या में मां अन्नपूर्णा के भक्त मंदिर में जुटते हैं।

मां की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन

मां अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप है।पहली मंजिल पर विराजमान माता अन्नपूर्णा की दिव्य स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के लिए दुनिया के तमाम श्रद्धालुओं को इस खास दिन का वेसब्री से इंतजार रहता है।

अन्नपूर्णा मंदिर के पट मां के भक्तों के लिए धन त्रयोदशी(धन तेरस) की सुबह खोल दिये जाते हैं।इस पुण्य अवसर पर मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी जी महाराज खुद अपने हाथों से मां के प्रसाद स्वरूप अन्न धन का वितरण करते है।

सुबह की आरती के पश्चात खुलते हैं पट

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि जिसे सामान्य बोलचाल में धनतेरस भी कहते हैं के दिन सुबह मंगल बेला में मां का षोडशोपचार पूजन होता है। जिसके बाद उनकी भव्य आरती आयोजित होती है। तत्पश्चात भक्तों में बांटने के लिए मां के खजाने का विधि विधान से पूजन होता है। इसके बाद ही मां के दिव्य दर्शन के लिए भक्तों को मंदिर में दाखिल होने का अवसर प्राप्त होता है। वहीं दोपहर में भोग आरती के लिए तकरीबन आधे घंटे तक के लिए मंदिर के कपाट को पुनः बंद कर दिया जाता है। भोग आरती के बाद लगभग दोपहर साढे 12 बजे से दोबारा दर्शन शुरू होता है जो कि रात्रि 11 बजे तक अनवरत जारी रहता है।

क्यों महत्वपूर्ण है मां अन्नपूर्णा का खजाना

धनतेरस के दिन मां अन्नपूर्णा का अनमोल खजाना भक्तों के लिए खोल दिया जाता है। मान्यता है कि इस खजाने में शामिल पैसे और को अगर अपने घरों में रख दिया जाए तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन धान्य की कमी नहीं होती। इस खजाने को सुख और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

मंदिर में इन चीजों पर प्रतिबंध

सुरक्षा के दृष्टिकोण से हर वर्ष बाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग मां अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन को लेकर कई दिशा निर्देश जारी करता है। सामान्य तौर पर मंदिर में भक्तों को अपने साथ माचिस लाइटर चाकू धातु का सामान मोबाइल फोन कैमरा सिम कार्ड लेकर आने पर सख्त प्रतिबंध है।

कौन है मां अन्नपूर्णा

अन्नपूर्णा देवी हिंदू धर्म में मान्य देवी देवताओं में विशेष रूप से पूजनीय है इन्हें जगदंबा का ही एक रूप माना गया है। मां अन्नपूर्णा संसार का भरण पोषण करने वाली देवी हैं। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि मनुष्य सहित सभी प्राणियों को भोजन मां अन्नपूर्णा की कृपा से ही उपलब्ध होता है।

मां अन्नपूर्णा और काशी नगरी से जुड़ी पौराणिक कथा

मान्यता है कि कलयुग में मां अन्नपूर्णा की पुरी काशी है। यहीं से वो सम्पूर्ण जगत के भोजन की ब्यवस्था करती हैं।बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के मां अन्नपूर्णा के आधिपत्य में आने की कथा भी बडी रोचक है।

नहीं भाया पिता का घर

मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी जी ने बताया की जब भगवान शंकर मां पार्वती के संग विवाह करके उनके पिता हिमालय के राज क्षेत्र के अंतर्गत कैलाश पर रहने लगे. तब देवी ने उनसे मायके के क्षेत्र से दूर शिव की नगरी काशी में रहने की इच्छा प्रकट की। जिसके बाद बाबा भोलेनाथ उन्हें साथ लेकर अपने सनातन घर अविमुक्त क्षेत्र यानी महाश्मशान काशी आ गये।

श्मशान में बसाया अपना डेरा

कहते हैं कि काशी उस समय केवल एक महाश्मशान नगरी थी। सामान्य गृहणी की तरह ही माता पार्वती को भी अपने घर का मात्र श्मशान होना पसंद नहीं आया। इस पर मां पार्वती और भगवान शिव द्वारा मिलकर यह व्यवस्था बनाई गयी की सतयुग त्रेतायुग और द्वापर युग में भले ही काशी श्मशान भूमि रहे लेकिन कलयुग में स्थान धन -धान्य से पूर्ण पुरी होगी। जिसका संचालन देवी पार्वती मां अन्नपूर्णा के रूप में करेंगी। उस वक्त यह पुरी मां अन्नपूर्णा की पुरी कहलाएगी।यही कारण है कि वर्तमान में मां अन्नपूर्णा मंदिर काशी का प्रधान देवी पीठ बना।

गृहस्थ विश्वेश्वर की गृहणी

स्कन्द पुराण के काशी खंड में लिखा है की भगवान विश्वेश्वर विश्वनाथ गृहस्थ हैं। और मां भवानी उनकी गृहस्थी चलाती है। अतः काशीवासी जो उनके बच्चों के समान हैं के भरण-पोषण का भार भी इसी दंपत्ति पर हैं।

भवानी ही है साक्षात मां अन्नपूर्णा

ब्रह्मवैवर्तपुराण के काशी रहस्य के अनुसार मां भवानी ही देवी अन्नपूर्णा है। श्रद्धालुओं की ऐसी धारणा है कि मां अन्नपूर्णा की नगरी काशी में कभी भी कोई भूखा नहीं सोता है। अन्नपूर्णा माता की उपासना से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह अपने बच्चों की सभी विपत्तियों से रक्षा करती हैं। इनके प्रसन्न हो जाने पर अनेक जन्मों से चली आ रही दरिद्रता का भी निवारण हो जाता है। यह अपने बच्चों को सांसारिक सुख प्रदान करने के साथ-साथ मोक्ष भी प्रदान करती है।

मां का व्यक्तित्व

मां अन्नपूर्णा देवी का रंग जवा पुष्प के समान है। इनके तीन नेत्र हैं। मस्तक की शोभा अर्द्ध चंद्र बढ़ाता है। भगवती मां अन्नपूर्णा अनुपम लावण्य से युक्त नव युवती के समान हैं। दिव्य आभूषणों से विभूषित होकर ये प्रसन्न मुद्रा में स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान है। मां के बाएं हाथ में अन्न से पूर्ण माणिक्य.रत्न से निर्मित कलछुल है। अन्नपूर्णा माता अन्नदान में सदैव तल्लीन रहती है।

साक्षात कल्पलता है मां अन्नपूर्णा

इन्हें पृथ्वी पर साक्षात कल्पलता भी कहा गया है.क्योकि यह अपने भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। स्वयं भगवान शंकर इनकी प्रशंसा में कहते हैं -मैं अपने पांचों मुख से भी अन्नपूर्णा का पूरा गुणगान कर सकने में समर्थ नहीं हूं।

मां अन्नपूर्णा से ही होती है मोक्ष की याचना

महंत रामेश्वर पुरी जी ने बताया की काशी में शरीर त्यागने वाले के कान में तारक मंत्र देकर मुक्ति भले ही बाबा विश्वनाथ देते हों मगर इसके लिए भी याचना मां अन्नपूर्णा से ही की जाती है।गृहस्थ लोग धन-धान्य तो योगी लोग ज्ञान और वैराग्य कि भिक्षा मां अन्नपूर्णा से ही मांगते हैं।

भेदभाव नहीं करती है मां अन्नपूर्णा

सम्पूर्ण जगत के अधिपति बाबा विश्वनाथ की अर्धांगिनी मां अन्नपूर्णा बिना किसी भेद भाव के हर प्राणीं का भरण पोषण करती है।

जो भी भक्ति भाव से इस वात्सल्यमयी माता अन्नपूर्णा का आह्वान करता है मां अन्नपूर्णा उसके यहां सूक्ष्म रूप से वास करती हैं।

अन्नपूर्णेसदा

पूर्णेशंकरप्राणवल्लभे

ज्ञान-वैराग्य-सिद्धयर्थम्

भिक्षाम्देहिचपार्वति

विकास राय

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