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बेहतर भविष्य की उम्मीद में बैठे साथियों को शुभकामनाएं

#साइनिंग-इंडिया

लोकसभा चुनाव के दौरान लहर पर एक वरिष्ठ पत्रकार साथी की टिप्पणी थी-देश की प्राथमिकता बदल रही है।

तब मैं कुछ कन्फ्यूज था, अब आश्वस्त हो गया हूं। बेशक, सही कह रहे थे। दो दिनों में दो झटके। पहले यूपी में 25 हजार होमगार्ड जवानों को दीवाली की सौगात, फिर आज रेलवे की नौकरी मिलने से पहले ही 15 हजार नौजवानों की उम्मीदों पर तुषारापात। रेलवे ने एनटीपीसी के तहत 25277 वैकेंसी को घटाकर 10648 कर दिया है। ऊपर से निजीकरण में बेरोजगारी और बढ़ सकती है, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता।

लेकिन छोड़िये, इसकी फिक्र हम क्यों करें। कौन सी ये नौकरियां हमें या हमारे घरवालों को मिलनी थी। जब जरूरत होगी, तब देखेंगे। जिसकी सत्ता होगी, उसे कोसकर जी हल्का कर लेंगे।

दरअसल, हम यूपी-बिहार वाले उत्सवधर्मी टाइप के होते हैं। पिछले महीने बाढ़ और बरसात के बाद भी हमने अपने जश्न में कोई कसर तो नहीं छोड़ी। हां, जो उससे प्रभावित हुए, उनका दर्द तो वही बता सकते है।

इस मुश्किल से भी निकल जाएंगे, उम्मीद है। अरे नहीं, पूरी संभावना है। देखिये न, इसी महीने दीवाली मनानी है। घर की सफाई, पटाखे… आदि-आदि। खर्च भी तो है। फिर अगले महीने के पहले हफ्ते में ही महापर्व छठ की व्यस्तता होगी।

सोच रहे होंगे, इसके बाद। अरे भाई, लग्न का सीजन आने वाला है। ऊपर से अपना अयोध्या भी तो है। वहां की चहलकदमी पर अभी से देश की निगाहें टिकी है। उम्मीदें भी ज्यादा बढ़ गयी है। इसमें दिसम्बर कट गया, तो अगले साल चुनाव।

बहरहाल… बेहतर भविष्य की उम्मीद में बैठे साथियों को शुभकामनाएं।

धनंजय पांडेय वरिष्ठ पत्रकार, प्रभात खबर

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