Breaking News
Home » धर्म-कर्म » नवरात्र विशेष : भक्तों का दैहिक दैविक एवं भौतिक ताप और संताप हर लेती है मां कष्टहरणी

नवरात्र विशेष : भक्तों का दैहिक दैविक एवं भौतिक ताप और संताप हर लेती है मां कष्टहरणी

गाजीपुर। 51 शक्ति पीठों में से एक प्रमुख पीठ मां दुर्गा का एक दिब्य स्वरूप है मां कष्टहरणी, जो पल भर में अपने भक्तों के दैहिक दैविक एवं भौतिक सारे ताप व संताप को हर लेती है। अपने दरबार में पहुंचे भक्तों की सारी मनोकामनाएं एवं मुरादे पूर्ण कर देती है मां कष्टहरणी। अपने भक्तों के सभी रोग शोक दु:ख का शमन करके धन धान्य एवं आरोग्यता प्रदान करने वाली माता का नाम है मां कष्टहरणी, जो युगो युगो से गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद से चितबड़ागांव मार्ग पर करीमुद्दीनपुर थाने के पास निवास करती है। सदैव अपनें भक्तों के कष्टों को हरने वाली मां का नाम है मां कष्टहरणी। दया की सागर ममतामयी करूणामयी मां का नाम है मां कष्टहरणी। मां का यह पावन एवं पवित्र धाम युगो युगो से करीमुद्दीनपुर में बिराजमान है। युगो पूर्व यह स्थान दारूक बन के नाम से जाना जाता था, जिस वन में शेर बाघ जैसे हिंसक जीव विचरण किया करते थे। मां के स्थान के बगल में बघउत बह्म बाबा का स्थान है। जनश्रुतियों के अनुसार बाघ से लड़ाई के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी थी, तभी से आप बघउत बह्म बाबा के नाम से यहां पर बिराजमान है। मां कष्टहरणी के यहां इस स्थान पर हर युग में विराजमान होने का प्रमाण मिलता है। आपकी शरण में आकर पवित्र मन से जो भी प्रार्थना किया, आपने उसका सदैव कल्याण किया। आपने अपने हरभक्त का सदैव मंगल ही किया है। आपके दरबार में सच्चे एवं पवित्र मन से की गयी आराधना कभी खाली नहीं जाती है। मां कष्टहरणी की कृपा अपने सभी भक्तों पर सदैव बरसती रहती है।

त्रेतायुग में भगवान राम, लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से सिद्धाश्रम बक्सर जाते समय यहां पर रूक कर मां कष्टहरणी का दर्शन पूजन किये थे। उसके पश्चात कामेश्वर नाथ धाम कारो, जो बलिया एवं गाजीपुर के सीमा पर स्थित है वहां पहुंचने का प्रमाण है। आपने कामेश्वर नाथ धाम में दर्शन पूजन कर रात्रि विश्राम किया तथा सुबह आप सभी गंगा पार कर बक्सर बिहार स्थित सिद्धाश्रम पहुंचे थे। यह कामेश्वर नाथ धाम वही स्थान है, जहां समाधिस्थ शिव को जगाने में कामदेव भष्म हो गया था। त्रेता युग में अयोध्या नरेश महाराज दशरथ अयोध्या से शिकार खेलते खेलते गाजीपुर जनपद के महाहर धाम तक आ गये थे। वहीं पर राजा दशरथ के शब्दभेदी बाण से श्रवण कुमार की मृत्यु हो गयी थी। आज भी उस स्थान पर श्रवण डीह नामक स्थान बिराजमान है। भगवान राम के साथ बक्सर जाते समय लक्ष्मण जी ने बाराचवर ब्लाक के उत्तर दिशा में रसड़ा के लखनेश्वरडीह नामक स्थान पर लखनेश्वर महादेव की स्थापना की थी, जो आज भी लखनेश्वर नाथ के नाम से जाने जाते है।

अब आपको ले चलते है द्वापर में जब धर्मराज युधिष्ठिर अपने भाइयों, द्रोपदी एवं कुल गुरू धौम्य ॠषी के साथ अज्ञातवास के समय मां कष्टहरणी धाम में आकर मां से अपने कष्टों को दूर करने के लिये प्रार्थना किये थे। मां के आशिर्वाद से महाभारत के युद्ध में पांडवों की विजय हुई। जैसा मां का नाम है उसी के अनुरूप आप वास्तव में अपनें भक्तों का कष्ट दूर करती हैं। राजसूय यज्ञ के समय भीम हस्तिनापुर से गोरखपुर श्री गोरखनाथ जी को निमंत्रण देने जाते समय भी मां कष्टहरणी का दर्शन पूजन किये थे। कलयुग में बाबा कीनाराम जी को स्वयं मां कष्टहरणी ने अपने हाथ से प्रसाद प्रदान कर सिद्धियां प्रदान की थी। बाबा कीनाराम कारों से रोजाना अपने गुरू जी के सो जाने के पश्चात मां के पास आ जाते थे और गुरू जी के जागने से पहले वापस कारो पहुंच जाते थे। एक दिन गुरुजी ने कीनाराम जी से पूछ दिया तो कीनाराम जी ने सच सच बता दिया कि मै मां कष्टहरणी की सेवा में चला जाता हूं। गुरु जी ने कीनाराम जी को जाने से तो नहीं रोका, लेकिन हिदायत दिया था कि वहां का कुछ भी खाना नही। एक दिन स्वयं मां ने अपने हाथ से कीनाराम जी को प्रकट होकर प्रसाद देकर सिद्धी प्रदान की।

गुरु जी द्वारा यह जानने पर खुद उन्होने कीनाराम जी को कहा कि जाओ अब तुम्हारे में वह सभी योग्यता हो गयी है, अब समाज का कल्याण करो। वहां से बाबा वाराणसी के गंगा तट पर पहुंचे तथा एक गंगा में बहते शव को देख कर बोले की तुम कहां जा रहे हो।बाबा कीनाराम जी की आवाज सुनकर वह मुर्दा उठ खड़ा हुआ। बाबा कीनाराम ने उसका नाम जियावन रखा। मां के आशिर्वाद से बाबा कीनाराम जी का यह पहला चमत्कार था। मां के धाम में गौतम बुद्ध,सम्राट अशोक, ह्वेन सांग, फाह्यान, स्वामी विवेकानन्द, सहजानन्द सरस्वती, मंडन मिश्र जैसे अनेक लोगों ने इस मार्ग से जाते समय मां का दर्शन पूजन किया है। ह्वेन सांग एवं फाह्यान ने यहां का वर्णन अपने यात्रा बृतांत में किया है। मां के धाम में आश्विन एवं चैत्र नवरात्र में मातायें दूर दर से आकर अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिये मां कष्टहरणी के चरणों में चौबिस घंटे तक अखंड दीपक जलाती है। पुरी रात मां के चरणों मे गीत एवं नृत्य करती है। पूर्वांचल ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में मां के पुराने स्थानों में से एक प्रमुख स्थान है, जितना अखण्ड दीपक मां कष्टहरणी के धाम में जलाया जाता है शायद पूरे भारत में और कहीं देखने को नहीं मिलेगा। देश के कोने कोने से लोग आकर मां का दर्शन पूजन करते है। वर्ष भर मां के धाम में शादी मुंडन कीर्तन एवं रामायण का आयोजन होता रहता है। मां के दर्शन मात्र से ही मानव का कल्याण हो जाता है। रामनवमी के दिन मां के धाम पर बिराट मेले का आयोजन किया जाता है। मां के धाम में अयोध्या से पधारे महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 श्री शिवराम दास जी फलहारी बाबा के द्वारा बिराट यज्ञ का आयोजन भी किया गया था। मां के मन्दिर के निर्माण में स्व. लाल बाबा का सराहनीय सहयोग रहा है। पुजारी के रूप में लम्बे समय से हरिद्वार पांण्डेय सेवा कर रहे थे, लेकिन अब उनके पुत्र राजकुमार पाण्डेय पुजारी के रूप में एवं किशुनदेव उपाध्याय व महेश्वर पाण्डेय मां की सेवा में लगे है।

विकास राय

Share With :
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel

About Poonam ( चीफ इन एडीटर )

चीफ इन एडीटर

Check Also

बलिया : जिन्दगी हार गई नंदिनी, 10 अक्टूबर को बनी थी आग का गोला

बलिया। 10 अक्टूबर को जय नारायण इंटर कालेज दुर्गीपुर बेरुआरबारी में आग लगाकर झुलसी 12वीं …

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.