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एक साथ उठीं आठ अर्थियां, अंतिम संस्कार के वक्त सहमा ‘शमशान घाट’

भोपाल। राजधानी में छोटा तालाब के खटलापुरा घाट पर हुए हादसे का शिकार हुए 11 में से 8 मृतकों के शवों का सुभाषनगर शमशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। जब मोहल्ले से एक साथ आठ अर्थियां उठीं तो पड़ोसी, रिश्तेदार, परिजन सबकी आंखें नम थीं। लोग यही कहते रहे, भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाए।

मोहल्ले से ही कतार में हजारों की संख्या में परिजन, पड़ोसी और दोस्त अंतिम विदाई देने के लिए पिपलानी से सुभाषनगर शमशान घाट पहुंचे। लोगों ने हादसे की वजह पुलिस प्रशासन की नाकामी बताया और इसे लेकर वह गुस्से में दिखाई दिए। सरकार नेमृतकों के परिजनों को11-11 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

शमशान घाट पहुंचे जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्माने दुखी परिजनों को ढांढस बंधाया और उन्हें हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। वह काफी देर तक शमशान घाट पर रुके रहे। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे गणेश विसर्जन के दौरान दो नाव के पलटने से 11 लोगों की मौत हो गई। इसमें 6 लोगों को रेस्क्यू कर बचा लिया गया। जानकारी के अनुसार दो छोटी नावें जोड़कर उसमें 17 फीट की गणेश प्रतिमा रखकर 20-25 लोग सवार हो गए थे, इससे नावों का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गईं।

पिपलानी से लेकर सुभाषनगर शमशान घाट तक लोगों की कतार लगी हुई थी, एक के बाद एक हादसे के शिकार शवों को शमशान घाट लाया जा रहा था। रोते-बिलखते उनके परिजन भी साथ-साथ पहुंचे रहे थे। 8 शवों का अंतिम संस्कार कर दिया है, वहीं दो शवों शनि ठाकरे और विशाल का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। विशाल के दोस्त दीपक ने बताया कि दोंनो के परिजन बाहर रहते हैं, वह मुंबई से चल पड़े हैं। शनिवार को सुबह पहुंचेंगे, जिससे उनकी अंतिम विदाई एक दिन बाद की जाएगी।

हादसे के शिकार इन मृतकों का अंतिम संस्कार

हादसे के शिकार परवेज़ खान (15), रोहित मौर्य (30), करण (16), हर्ष (20), राहुल वर्मा (30), विक्की (28), अर्जुन शर्मा (18), राहुल मिश्रा (20) और करण (26) का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। सभी युवक स्थानीय पिपलानी क्षेत्र के निवासी थे।

रोहित, बहन का इकलौता बेटा था

शमशान घाट पहुंचे हादसे के शिकार रोहित के मामा रवि कुशवाहा ने कहा भांजा रोहित बहन का इकलौता बेटा था, वही घर संभालता था। घर को सूना करके चला गया। बहन बहुत अकेली हो जाएगी। वह कभी नहीं जाता जाता था विसर्जन में। लेकिन इस बार दोस्तों ने कहा और चला गया। उसे तैरना नहीं आता था।

अगर लाइफ जैकेट पहनाया होता था बच जाता भतीजा

पिपलानी के विनोद के भतीजे करण की मौत हो गई। बोले- पुलिस और प्रशासन की लापरवाही की वजह से उनकी जान गई। सबने देखा कि बच्चे हैं, इन्हें तैरना नहीं आता था। इसके बाद भी तालाब में अंदर जाने दिया। रात को मेरी बात हुई तो बोला- चाचा मैं भी विसर्जन के लिए जा रहा हू्ं।

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