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तुम्हीं तुम हो मेरे ख्यालों में, मेरी धड़कन में, मेरी सांसों में…

तुम्हीं तुम हो मेरे ख्यालों में, मेरी धड़कन में, मेरी सांसों में

मेरे लफ्जों में, मेरे गीतों में, तेरी आहट है मेरी नब्जों में

मेरे हिस्से की काली रातों में, तू ही रौशन है चांद-तारों में

तुम्हीं तुम हो मेरे ख्यालों में, मेरी धड़कन में, मेरी सांसों में

तू है सावन मैं हूं जमी प्यासा, बरस समेट लूं तुझको अपने दामन में

तुम्हीं तुम हो मेरे ख्यालों में, मेरी धड़कन में, मेरी सांसों में

आ कि बीते न ये जन्म फिर से, एक-दूजे को आजमाने में

तुम्हीं तुम हो मेरे ख्यालों में, मेरी धड़कन में, मेरी सांसों में

ओम सिंह ‘कृत’, बलिया

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