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अच्छी पहल : अब नौवीं कक्षा से हर बच्चे को मिलेगा एनसीसी प्रशिक्षण

मेरठ। देश के हर बच्चे को सैन्य प्रशिक्षण देना भले ही फिलहाल संभव न हो, लेकिन स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे को एनसीसी की ट्रेनिंग देने की कवायद शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश एनसीसी निदेशालय ने इस बाबत प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। एनसीसी महानिदेशक स्तर पर इस पर विचार भी किया जा रहा है। शुक्रवार को मेरठ दौरे पर आए उप्र एनसीसी के एडीजी मेजर जनरल अरुण कुमार सप्रा ने बताया कि नौवीं कक्षा से कुछ क्लास (पीरियड) निकालकर उसे एनसीसी को देने का प्रस्ताव रखा गया है। स्कूलों के शिक्षकों को एनसीसी ट्रेनिंग देगी, जिससे वह कैडेट्स को स्कूल में ट्रेनिंग दे सके। एक कैडेट की ट्रेनिंग के लिए सालभर में करीब साढ़े छह हजार रुपये खर्च होते हैं। जल्द ही यह प्रस्ताव केंद्र व प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही इसे लागू किया जाएगा।

15 लाख होंगे एनसीसी कैडेट्स

मेजर जनरल सप्रा ने बताया कि देशभर में एनसीसी कैडेट्स की संख्या 13 लाख से 15 लाख करने की तैयारी चल रही है। इस कड़ी में एनसीसी बटालियनों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। उत्तर प्रदेश को बांदा व बहराइच में एक-एक एनसीसी बटालियन खड़ी करने की अनुमति मिल चुकी है। एक अन्य प्रस्ताव भी है, जिसमें स्कूल व कॉलेज पूर्व एनसीसी अफसर व पूर्व सैनिकों को शिक्षक के तौर पर नियुक्त करेंगे और स्कूल में बच्चों को एनसीसी की ट्रेनिंग देंगे। वहीं एनसीसी बटालियन केवल कैंप कराएंगी। इससे आने वाले समय में 15 लाख से 60 लाख तक एनसीसी कैडेट्स तैयार किए जा सकते हैं।

बालिकाओं की बढ़ रही रुचि

एनसीसी एडीजी मेजर जनरल एके सप्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 30 फीसद बालिका कैडेट्स हैं। हर साल बालिकाओं के लिए निर्धारित सीटें भर जाती हैं, जबकि बालकों की कुछ सीटें रिक्त रह जाती हैं। प्रदेश में फिलहाल 1.30 लाख कैडेट्स हैं। दो बटालियन बढ़ने से 1.36 लाख हो जाएंगे। बालिकाएं स्कूल या कॉलेज यदि एनसीसी लेने का आवेदन करते हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर एनसीसी मुहैया कराई जाएगी।

इस सत्र से बदल गया एनसीसी पाठ्यक्रम

एडीजी ने बताया कि इस सत्र से ही एनसीसी का नया पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसकी किताबें बन रही हैं, जो जल्द ही सभी जिलों को मिल जाएंगी। सिलेबस को जांचने पर देखा गया कि जो चीजें बच्चों को स्कूल या कॉलेज में पढ़ाई जाती हैं वही एनसीसी में भी थीं। इससे दोहराव अधिक होता था। साथ ही एनसीसी के ‘ए’ एवं ‘बी’ सर्टिफिकेट में तकरीबन समान पाठ्यक्रम था, जिसे अब बदल दिया गया है। नए सिलेबस में ट्रेनिंग के अलावा कम्यूनिकेशन स्किल, सामान्य ज्ञान, रीजनिंग एबिलिटी को विकसित करने पर जोर होगा। बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा हेतु मार्शल आर्ट ट्रेनिंग को बढ़ाया गया है।

तैयार होगा मल्टीमीडिया कोर्स

एनसीसी कैडेट्स की क्लास छूटने या रिवीजन में मदद के लिए एनसीसी की ओर से मल्टीमीडिया कोर्स मैटेरियल तैयार किया जाएगा। एडीजी ने बताया कि इसकी जिम्मेदारी जिला विज्ञान क्लब मेरठ के जिला समन्वयक दीपक शर्मा को दी गई है। साथ ही वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए भी सिलेबस में कुछ बदलाव किए जाएंगे।

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