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सीबीएसई : प्रयोगात्मक परीक्षा में बदलाव की तैयारी, रडार पर डमी स्कूल

प्रयागराज। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) आगामी बोर्ड परीक्षा 2020 में प्रयोगात्मक परीक्षा में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब 12वीं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं दूसरे विद्यालयों में होंगी। पहली बार छात्रों को प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए अलग से प्रवेशपत्र भी जारी किए जाएंगे। इस आशय का पत्र बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज की ओर से स्कूलों को जारी किया गया है।

बोर्ड ने यह बदलाव परीक्षकों और परीक्षार्थियों की शिकायतों के आधार पर किया है। बोर्ड के पास पहुंची शिकायत के बाद स्वकेंद्र प्रयोगात्मक परीक्षा व्यवस्था पर रोक लगने जा रही है।प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए जारी होने वाले प्रवेशपत्र पर परीक्षार्थी का फोटो भी लगेगा।बोर्ड का मानना है कि अभी तक अपने ही स्कूल में प्रयोगात्मक परीक्षा होने पर प्रवेशपत्र जारी नहीं होता था। स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रयोगात्मक परीक्षा लेने आने वाले परीक्षक को प्रभावित कर लेते थे।

बोर्ड को इस प्रकार की शिकायतें मिली हैं कि कुछ अभिभावकों का स्कूल के प्रबंधन पर प्रभाव रहता है, ऐसे में उनके बच्चों को बिना प्रयोगात्मक परीक्षा दिए ही अच्छे नंबर मिल जाते थे। स्कूल के प्रभाव में परीक्षक मनचाहे अंक देकर बोर्ड को भेज देते थे।

डमी स्कूल पर लगेगी लगाम
कुछ डमी टाइप के स्कूलों में प्रयोगात्मक परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा होता है। इस प्रकार की शिकायतें बोर्ड के पास बाहरी परीक्षक बनाकर भेजे गए शिक्षकों ने भेजी है। कई परीक्षा केंद्रों पर तो छात्रों को ब्लैंक शीट पर नंबर दे दिए गए। डमी स्कूल दूसरे शहरों में इंजीनियरिंग एवं मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को अपने यहां प्रवेश देकर मनचाहे नंबर दिलवाते हैं। बोर्ड की ओर से अबकी बार गलत तरीके से प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को पकड़ने की पूरी तैयारी है। उन स्कूलों की जांच भी की जाएगी जहां प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए लैब की सुविधा नहीं है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में लैब नहीं होगी, उन स्कूलों के छात्रों को दूसरे केंद्रों पर परीक्षा के लिए जाना होगा।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था लागू हो सकती है
सीबीएसई प्रयोगात्मक परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने और गलत तरीके से प्रवेश लेकर कभी स्कूल नहीं जाने वाले छात्रों पर निगरानी रखने के लिए स्कूलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था लागू कर सकता है।
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