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स्टीम ब्वालर बन गया हैं बलिया शहर

प्रचंड गर्मी में बलिया शहर की सड़कों और गलियों से सूर्यास्त के बाद गुजरते हुए क्या आपने अनुभव किया है, जैसे आप किसी भाप के इन्जन के पास गुजर रहे हैं। जी हां, आप का अनुभव सही है।

बेतरतीब और संकरी सड़कों वाला यह शहर शाम को स्टीम ब्वालर बन जाता है। आपके आस पास बने सीमेन्ट और ईंट से बने मकान दिन में सूर्य की गर्मी को अवशोषित कर गर्म हो जाते हैं, जिससे इनका ताप बढ जाता है।

शाम होते ही सूर्यास्त के बाद ये अपनी उष्मा अब बाहर निकालने लगते हैं। आप इस निकलती हुई गर्मी का अनुभव भी करते हैं, जब आप बाहर निकलते हैं‌। ऐसा लगता है कि आप किसी भाप के इन्जन के पास से गुजर रहे हैं।

ऎसा होना स्वाभाविक है, पर बलिया जैसे शहरो के साथ दिक्कत है कि इस छोटी सी जगह में इन मकानों की संख्या इतनी अधिक है कि उष्मा को बाहर निकलने के लिये पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। मकानों के बीच इतनी कम जगहे है कि उष्मा ट्रैप होकर तापमान शाम को कम ही नहीं होने देती।

इसके विपरीत गांव अपेक्षाकृत जल्दी ठंडे हो जाते हैं और शहरो मे शाम को भी तापमान ऊंचा बना रहता है। इतना जरूर है कि शाम को ठंडी हवाये चलने से यह उष्मा बाहर चली जाती है और तापमान में कुछ कमी आती है, पर इसके न चलने पर शहर की उष्मा बाहर नहीं जा पाती और गर्मी लगती है।

अतः शाम को आप अत्यधिक गर्मी का अनुभव कर रहे है तो इसके लिये केवल सूर्य देवता को दोषी मत मानिये। यह शहर ही है, जो अपने अस्त व्यस्त और बेतरतीब मकानों से निकलने वाली उष्मा को बाहर नहीं जाने दे रहा है।

सुधांशु मिश्र प्रवक्ता, भौतिक विज्ञान, पीएन इंटर कालेज दूबेछपरा, बलिया

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