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बलिया कनेक्शन : मैं लिखता हूं प्रेम, वे पढ़ते हैं घृणा

मैं लिखता हूं प्रेम
वे पढ़ते हैं घृणा।

उन्होंने कैसे पढ़ लिया था द्वेष
जब मैंने लिखा था करुणा।

हर बार क्षमा और दया
उनके लिए नफरत में क्यों बदल जाती है।

क्या शब्दों के मायने बदल गए हैं?

अब उनके वह अर्थ नहीं होते, जो कल तक हुआ करते थे।

या फिर उन्होंने तय कर लिया है
कि हम प्रेम, क्षमा, दया और करुणा को।

ईर्ष्या, द्वेष, घृणा और नफरत ही पढ़ेंगे।

आशीष त्रिपाठी, वरिष्ठ रंगकर्मी बलिया की फेसबुक वाल से

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