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बलिया में बढ़ी सियासी गरमाहट, चन्द्रशेखर के बहाने इस बड़े वोट बैंक पर मोदी और अखिलेश की नजर

बलिया। देश- दुनिया से अलग मिजाज रखने वाले बागी बलिया में सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान है। जब देश के अधिकतर हिस्सों में चुनावी तपिश थम चुकी है, बलिया में गरमाहट बढ़ती जा रही है। सियासी पारा मंगलवार को और चढ़ गया, जब चुनावी दंगल में बलिया की सरजमीं पर सियासी दिग्गजों का दिलचस्प मुकाबला हुआ। शहर से सटे माल्देपुर में आयोजित भाजपा की जनसभा में पीएम मोदी PM MODI व सीएम योगी CM YOGI ADITYANATH ने जहां सपा, बसपा व कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोला, वहीं बलिया के ही अलावलपुर में गठबंधन की चुनावी जनसभा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव AKHILESH YADAV ने भाजपा पर एक साथ ताबड़तोड़ वार किया। हालांकि दोनों रैलियों में तीन दशकों तक भारतीय राजनीति की धुरी रहे युवा तुर्क चन्द्रशेखर CHANDRASHEKHAR को लेकर समानता जरूर दिखी। दोनों रैलियों के केन्द्र में रहे चन्द्रशेखर को सबने भुनाने की कोशिश की, लेकिन दोनों के लक्ष्य अलग-अलग रहे।

गौरतलब हो कि पूर्व पीएम चन्द्रशेखर का राजनीतिक सफर देश के अन्य राजनेताओं से अलग रहा है। एकला चलो की नीति पर चलने वाले चंद्रशेखर जब तक जीवित रहे, देश को दिशा देते रहे। युवा तुर्क चंद्रशेखर को हमेशा अपना राजनीतिक अगुआ मानने वाली बागी धरती ने उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी राजनैतिक विरासत छोटे पुत्र नीरज शेखर को सौंप दी। 2009 के आम चुनाव में भी बलिया ने नीरज शेखर को सांसद चुनकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजा। 2014 में नीरज शेखर चुनाव हार गये, तब सपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा।

2019 के आम चुनाव में राज्यसभा सांसद होने का हवाला देकर सपा ने नीरज शेखर का टिकट काट दिया। नीरज शेखर का टिकट कटने से जिले की राजनीति का रंग कुछ अलग दिख रहा है। नीरज का टिकट कटने से समाजवादियों को क्षत्रिय वोट खिसकने का डर सता रहा है, वहीं भाजपा इस कोर वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश में है।

बात चाहे जो हो, पर पीएम मोदी ने अपने भाषण के प्रारम्भ में ही जिले की महान विभूतियों के साथ जयप्रकाश नारायण और चन्द्रशेखर काे नमन कर खास तवज्जो दी। मंच से प्रधानमंत्री द्वारा चन्द्रशेखर को खासा अहमियत देना, राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है। यह नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा भी कर रहा है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नीरज शेखर की अनुपस्थिति में समाजवादी नेता चन्द्रशेखर व उनके परिवार से रिश्ते की दुहाई और उनके सम्मान की बात की। अपने भाषण में युवा तुर्क चन्द्रशेखर और नीरज को केन्द्रित रख अखिलेश ने स्पष्ट किया कि हम आपके सम्मान में कभी कोई कमी नहीं करेंगे। दोबारा भी वह सम्मान करेंगे। नीरज के लोग यह न सोचें कि हमने उनका टिकट काटा है। हमने 2014 में उनका सम्मान किया और राज्यसभा भेजा। उनके पिता और चन्द्रशेखर जी के नाम पर यूनिवर्सिटी दी, लेकिन भाजपा सरकार हमारे दिए पैसे को भी वापस ले लिया।

इस बार चुनाव में दोनों ध्रुवों द्वारा चन्द्रशेखर का उल्लेख व खास तवज्जो देना कुछ अलग संकेत कर रहा है। हाल फिलहाल राजनीति के बनते-बिगड़ते समीकरणों में कयासों का बाजार गर्म है। बहरहाल युवा तुर्क के नाम पर शुरू हुए इस खेल में कौन बाजी मारता है, यह भविष्य के गर्भ में है। इस पर कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगा।

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