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मैं बागी बलिया हूं, फजीहत न करें! मेरी अस्मिता को…

आजादी की लड़ाई में मेरी अहम भूमिका रही। मंगल पांडेय, चित्तू पांडेय, जय प्रकाश नारायण, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, चन्द्रशेखर, क्रांतिकारियों की धरती से मुझे नवाजा जाता है। लेकिन मुझे दुख है कि मेरे नाम पर आज तक केवल राजनीति होती रही।

एक जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के नाम को छोड़ दिया जाय तो मेरी नजर में कुछ नही दिख रहा। मैं बलिया हूँ। मेरे यहाँ के युवा बाहर जाकर अपने घर परिवार की रोजी रोटी चलाते हैं। और मेरे नाम पर राजनीति करने वाले लोग मुझे कटाक्ष सुनवाते हैं। एक ऐसा भी समय आया कि हमने देश का सर्वोच्च पद चन्द्रशेखर के हाथों दिया।

प्रधानमंत्री तथा रेलमंत्री एक साथ मैंने दिया। फिर भी विकास के लिए मैं बलिया तरसता रहा। एक अच्छा काम मुझे दिखाई दिया कि उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गंगा सेतु बन गया। अप्रोच मार्ग यूपी -बिहार की तरफ से उक्त सेतु में जोड़ा जा रहा है। दिख रहा है। मेरा आग्रह है। मैं बागी बलिया हूँ।

मुझे फजीहत न किया जाय। आगामी 19 मई को मतदान है। चुनाव आयोग की मेहनत देखकर भी मैं चिंतित हूँ। मेरा विनम्र निवेदन है कि मेरा बलिया बढ़चढ़ चुनाव में भागीदारी निभाए ताकि मतदान का प्रतिशत बढ़ सके। जैसा मेरा नाम बागी बलिया है।उसी तरह मत का प्रतिशत भी बढ़ाकर बलिया का नाम ऊँचा हो सके। मेरी अस्मिता को बचाने की कोशिश हो, तभी मुझे सुकून मिलेगा।

नरेन्द्र मिश्र पत्रकार

बलिया

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