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नवरात्र : बलिया के इस स्थान पर इसलिए जुटती है भीड़

मनियर, बलिया। नवरात्र महीने में जहां मां दुर्गा की मंदिरों में भीड़ लगती है वही ऐसे स्थानों पर भी अपार भीड़ होती है, जहां पर प्रेत आत्माओं से लोगों को मुक्ति मिलती है। उन्हीं स्थानों में से उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित मनियर नवका ब्रह्म का स्थान है, जहां पर नवरात्रि में देश के कोने-कोने से लोग प्रेत आत्मा से छुटकारा पाने के लिए आते हैं।

मनियर के नवका ब्रह्म की उत्पत्ति करीब 300 से 400 वर्ष पुरानी मानी जाती है। बताया जाता है कि बिहार प्रांत के सीवान जनपद के चैनपुर गांव में राम शरण चौबे एवं शिव शरण चौबे बाल्यावस्था में थे। बाल्यावस्था में ही उनके ललाट की चमक एवं सात्विक विचार हम उम्र के बालकों से उन्हें विरक्त करती थी। कहते हैं कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात वाली कहावत उन पर चरितार्थ होती थी, लेकिन गरीबी उन्हें मजदूरी करने के लिए विवश कर दी।

दोनों भाई एक पड़ोसी गांव के जमींदार राय साहब के यहां रहकर मजदूरी करने लगे।बताया जाता है कि राय साहब के पड़ोसी एक डायन महिला थी जो दोनों भाइयों को भोजन पर आमंत्रित की एवं मारण मंत्र से दोनों लोगों की आत्माओं को एक डिबिया में कैद कर ली। कुछ दिनों बाद उक्त डायन की लड़की की शादी मनियर के एक युवक से हुई। विदाई के वक्त डायन ने लड़की को डिबिया देते हुए कही कि इसे घाघरा नदी में फेंक देना।

नाव बारातियों से भरी होने के कारण उक्त दुल्हन डिबिया फेंक नहीं पाई और ससुराल लाकर हाथ से आटा पीसने वाली चक्की के नीच गाड़ दी। बरसों बीत गए। नई दुल्हन बुड्ढी हो गई। एक दिन चक्की टांकते समय दोनों आत्माएं आजाद हो गई और घर में आग लग गई। आकाश से चीत्कार होने लगा। आकाश से गर्जन के साथ खून, मांस के लोथड़े इत्यादि सब गिरने लगे।

भयभीत घर वाले मनियर के ही एक तांत्रिक शास्त्री जी के पाठशाला पर गए एवं दोनों आत्माओं से बचाव की गुहार लगाई। शास्त्री जी ने दोनों आत्माओं को गुरुमुख करने के बाद पिंड का रूप दिया, जहां उनका मंदिर है। उसके बाद एक और घटना घटित हुई।

बिहार प्रांत के ही एक जमींदार जो लाव लश्कर के साथ गंगा स्नान करने जा रहा था ।उक्त पिंड के पास अपना पड़ाव डाला और पास स्थित तालाब में स्नान किया। उस जमींदार को कुष्ठ रोग था, जो समाप्त हो गया तथा उसे स्फूर्ति महसूस हुई। उसने उस पिंड के पास विशाल मंदिर बनवा दिया।

ऐसा माना जाता है कि उसके बाद लोग आते गए और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती गई। नवका ब्रह्म स्थान से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर सतकू बाबा का स्थान है। वहां भी नवरात्र महीने में काफी भीड़ लगती है। इन दोनों स्थानों पर भूत प्रेत से ग्रसित लोगों का ज्यादा आना जाना होता है।

भूत प्रेत एक अलौकिक प्राणी माना जाता है। इनके कई नाम भी है ।जैसे ब्रह्म, पिशाच, प्रेत, कुष्मांडा, बेताल, क्षेत्रपाल, डायन, चुड़ैल, हाकिनी, डाकिनी, मर्हिन, जीन, अघढ़ इत्यादि। लोग बताते हैं कि मृत्यु से पहले जिनकी इच्छाएं तृप्त नहीं हो पाती, मृत्यु के बाद उनके वंशज उनका श्राद्ध कर्म नहीं करते या जिनकी अकाल मौत (जैसे हत्या आत्महत्या, दुर्घटना) वे लोग भूत योनि में जन्म लेते हैं।

आज विज्ञान इतना चरमोत्कर्ष पर पहुंच चुका है कि तमाम ग्रहों, उपग्रहों उल्कापिंडों आदि की खोज कर रहा है इसके बावजूद भी इन स्थानों पर न सिर्फ कम पढ़े लिखे लोग बल्कि पढ़े लिखे एवं उच्च पदों पर आसीन लोग भी आते हैं।

वीरेन्द्र सिंह, मनियर-बलिया

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