Breaking News
Home » धर्म-कर्म » मां ब्रह्मचारिणी के इस स्तोत्र का पाठ करने से दूर होती हैं मुश्किलें

मां ब्रह्मचारिणी के इस स्तोत्र का पाठ करने से दूर होती हैं मुश्किलें

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। ब्रह्मचारिणी देवी के दोनो हाथों मे अक्षमाला और कमंडल होता है। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है। ब्रह्मचारिणी देवी मां दुर्गा का द्वितीय रूप है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तपश्चारिणी हैं यानी तपस्या करने वाली, इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हैं।

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करने के बाद स्तोत्र और कवच का पाठ करना चाहिए। जिससे देवी प्रसन्न होती हैं। ब्रह्मचारिणी देवी का स्तोत्र का पाठ करने से ज्ञान और शांति मिलती है। हर तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। वहीं सोचे हुए काम भी पूरे हो जाते हैं।

ब्रह्मचारिणी स्तोत्र

तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।

ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।

शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥

इसके बाद ब्रह्मचारिणी कवच स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। इसका पाठ करने से रक्षा होती है। ब्रह्मचारिणी कवच स्तोत्र पाठ करने से तनाव दूर होता है और कोई अनहोनी नहीं होती। इस कवच का पाठ करने से दुर्घटना से भी रक्षा होती है।

ब्रह्मचारिणी कवच स्तोत्र

त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।

अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥

पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥

षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।

अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

Share With :
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel

About Poonam ( चीफ इन एडीटर )

चीफ इन एडीटर

Check Also

नवरात्र : बलिया के इस स्थान पर इसलिए जुटती है भीड़

मनियर, बलिया। नवरात्र महीने में जहां मां दुर्गा की मंदिरों में भीड़ लगती है वही …

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.