Breaking News
Home » अपनी बात » 24 घंटा सरहद पर चौकन्ना रहने वाले जवानों को इस हाल में देख मायूस हो जाता हूं मैं

24 घंटा सरहद पर चौकन्ना रहने वाले जवानों को इस हाल में देख मायूस हो जाता हूं मैं

“भारतीय सेना का सम्मान तो जरूर है, लेकिन सेवानिवृत्त के बाद भी उसी तरह हो सम्मान”
देश के सरहद पर अडिग, गांवों और शहरों से दूर जंगलों में रहने वाले उन बहादुरों को हम सैनिक कहते हैं। सरहद पर जब सेना का जवान ऑन ड्यूटी रहता है। देश की रक्षा के आगे परिवार की तरफ नजर तक नही जाती। हम सभी गर्व भी करते हैं। सुविधाएं जो भी होती हैं। सरकार की तरफ जरूर मिलती हैं। जब भी देश पर कोई संकट आता है या बड़ी घटना होती है सेना बुला ली जाती है। निःसंकोच सैनिक जान की बाजी लगाकर सेवा में जुड़ जाते हैं।

एक सैनिक पूरी नौकरी कर सेवानिवृत्त जब होता है। उसे अन्य जगहों पर भी नौकरी मिलने का प्राविधान है। लेकिन वह भी औपचारिकता ही पूर्ण हो रहा है। जब सैनिक सेवानिवृत्त होता है तो बैंक से लेकर रेलवे, शिक्षा या अन्य फोर्स, विभागों में जगह मिलती है। परंतु नौकरी उन्हें मिलती है, जो अध्ययन किये रहते हैं। यहां एक सवाल पीछा कर रहा, क्या हर फौजी सेवाकाल में अध्ययन किया करता है ?

ऐसे सैनिकों को जब सेवानिवृत्त होने पर कहीं संस्थान में गेट पर तैनात देखता हूं, मैं मायूस हो जाता हूं। तरस आती है कि यह फौजी जब सरहद पर होता है, वर्दी में कितना अच्छा लगता है। चौबीस घण्टा देश के प्रति चौकन्ना रहता है। वहीं सेवानिवृत्त होते ही वह पूर्व सैनिक नौकरी करते गेट पर खड़ा बन्दूक कंधे में लिये शांत खड़ा रहता है। या कहीं सचिवालय, वाराणसी के बीएचयू में तैनात देखता हूँ मुझे उन पूर्व सैनिकों को देखकर अजीब सा लगता है।

कुछ सैनिकों के तो असलहे भी अधर में

जम्मू, कश्मीर, पूँछ इलाका में तैनात सैनिकों ने असलहा का लाइसेंस लिया कि सेवा निवृत्त के बाद कहीं पुनः रोजी-रोटी मिल जाएगी या अपनी सुरक्षा को लेकर ही चिंतित रहे। शासन द्वारा पत्र जारी हुआ। अखबारों में प्रकाशित हुआ कि ऑनलाइन करवा कर नवीनीकरण किया जाएगा। ऐसे में कुछ पूर्व सैनिक प्रदेश के बाहर पुनः नौकरी में हैं, जिन्हें पता नही चल सका। शासन द्वारा क्या निर्देश जारी हुआ। असलहा नवीनीकरण के लिए जब चालान कटवाने आये तो पता चला फीस 60 रुपये से पन्द्रह सौ रुपये हो गया।विचारा चालान कटवा भी लिया तो ऑनलाइन समस्या बन गई। सरहद पर ड्यूटी करने के बाद बड़ी तपस्या से असलहा भी बना, किंतु असलहा नवीनीकरण को लेकर अधर में लटक गया है।

‘सेवा निवृत्त के बाद भी ड्यूटी में कोताही नही, कुछ तो शिक्षक भी हैं’

सैनिक सेवानिवृत्त जब होकर आता है तो जो भी नौकरी मिल जाय बड़े ही ईमानदारी से पुनः नौकरी में जुड़ जाता है। और यहां भी समय की कोई सीमा नही रहती। अगर सौभाग्य वश बैंक, शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। ड्यूटी करने लगता है। इस प्रकार सेवा निवृत्त के बाद भी ड्यूटी में कोई कोताही नही होती। कुछ फौजी शिक्षक भी हुए हैं।जिन पर आज भी गर्व होता है।

बच्चों को पढ़ाने में भी दिक्कत

केंद्रीय विद्यालय लगभग हर जनपद में हैं।सैनिक अगर सरहद पर तैनात है। अपने गृह जनपद में परिवार रखा है। तो उसे बच्चों की पढ़ाई की भी चिंता है। ऐसे में अगर सैनिक के बच्चे को नामांकन करवाना हो, निश्चित ही जनपद स्तर पर अगर पैरवी नही है। सैनिक के बच्चों का नामांकन नही हो सकेगा। वजह कि कुछ माननीय, कुछ अधिकारी का कोटा है। उसके सापेक्ष सैनिक पीछे छूट जाते हैं। हम सभी भारतीय सेना पर गर्व करते है। और करते रहेंगे। अपितु इनके सम्मान पर ख्याल रखा जाय। जय हिंद।

बलिया के पत्रकार नरेन्द्र मिश्र के फेसबुकवाल से

Share With :
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel
Do Not Forgot To subscribe Purvanchal24 Youtube Offcial Channel

About Poonam ( चीफ इन एडीटर )

चीफ इन एडीटर

Check Also

बेलगाम बोल का भयावह शक्ल

बेलगाम बोल व बदमिजाज कार्यप्रणाली कितना भयावह शक्ल अख्तियार कर सकती है, यह सुभासपा के …

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.